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कर्नाटक चुनाव/महासंग्राम-:-क्या राज्यपाल को रोक सकता है न्यायालय मध्य रात्रि को क्या हुआ सर्वोच्च न्यायालय में पढ़े बहस का हर एक पहलू-सुजीत मिश्रा सिट्टी 

कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए राज्यपाल की तरफ से बीजेपी विधायक दल के नेता येदियुरप्पा को सरकार बनाने का निमंत्रण देने का मामला बुधवार को देर रात सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे जा पहुंचा। कांग्रेस और जेडीएस की तरफ से येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने की कोशिश तो कामयाब नहीं हुई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने विधायकों की लिस्ट सौंपने को कहा है। ऐसे में येदियुरप्पा का शपथ ग्रहण आज तय समय पर ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आज सुबह 10:30 बजे तक दोनों पक्षों को अपने-अपने विधायकों की लिस्ट सौंपने को कहा है। मुंबई बम धमाके के आरोपी याकूब के मामले में आधी रात सुप्रीम कोर्ट खुलने के बाद यह दूसरा मौका था जब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष देर रात हाई प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर उनकी याचिका स्वीकार कर ली और रात के 1:45 मिनट पर तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की।

इस बेंच में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस सीकरी और जस्टिस बोबडे शामिल थे। मामले में केंद्र सरकार की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, बीजेपी की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने गवर्नर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि शपथ ग्रहण पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात को माना है कि विश्वास मत साबित करने के लिए दिए गए 15 दिन के समय पर सुनवाई हो सकती है।
कोर्ट द्वारा जब यह कहा गया कि शपथ ग्रहण पर रोक नहीं लग सकती तो कांग्रेस की ओर से बहस कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने मांग रखी कि शपथ ग्रहण समारोह को 4:30 बजे तक के लिए टाल दिया जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को भी मानने से इनकार कर दिया।

देर रात कुछ यूं चला घटनाक्रम:-

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और जेडीएस का याचिका खारिज नहीं की है और कहा, ‘यह याचिका बाद में सुनवाई का विषय है।’ इसके साथ ही दोनों पक्षों समेत येदियुरप्पा को एक जवाब दाखिल करने का नोटिस भी जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

अटॉर्नी जनरल बोले, ‘कृपया इस याचिका को खारिज करे दें। वे एक उच्च स्तरीय संवैधानिक सिस्टम के कार्य को रोकने के लिए यह फैसला चाहते हैं। यह राज्यपाल का काम है कि वह शपथ के लिए बुलाएं। राज्यपाल और राष्ट्रपति किसी भी कोर्ट के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं। ऐसे में कोर्ट को चाहिए कि वह संवैधानिक कार्यप्रणाली को ना रोके।’

बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिए जाने पर जब कोर्ट ने सवाल पूछा को मुकुल रोहतगी बोले, ‘सुप्रीम कोर्ट चाहे तो इस समय को 10 दिन या सात दिन कर सकता है।’

अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा, ‘यह याचिका दायर करने के बजाय कांग्रेस और जेडीएस को फ्लोर टेस्ट का इंतजार करना चाहिए था।’

जस्टिस सीकरी ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा, ‘जब एक पक्ष 117 विधायकों का समर्थन दिखा रहा है तो 112 विधायकों का समर्थन दूसरे पक्ष को कैसे मिल जाएगा?

मुकुल रोहतगी बोले, ‘मामले पर रात में सुनवाई नहीं होनी चाहिए। अगर शपथ ग्रहण हो जाता है तो आसमान नहीं गिर जाएगा। पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में रात में सुनवाई याकूब मेमन की फांसी के लिए हुई थी।’

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘यह कहना निरर्थक है कि बिना शपथ लिए विधायक ऐंटी डिफेक्शन लॉ के तहत बाध्य नहीं है। यह खुलेआम हॉर्स ट्रेडिंग को न्योता देता है।’

जस्टिस बोबडे ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि बीएस येदियुरप्पा ने किस तरह के बहुमत का दावा किया है। जब तक कि हम समर्थन पत्र को नहीं देख लेते हम कोई अनुमान नहीं लगा सकते हैं।’

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से पहुंचे अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘हमारे (जेडीएस+कांग्रेस के) पास 117 सीटें और बीजेपी के पास मात्र 104 तो वह बहुमत कैसे साबित करेगी? सिंघवी ने कोर्ट में यहा भी काह कि जेडीएस ने सबूत के साथ दावा रखा था और कुमारस्वामी ने विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी राज्यपाल को दी थी।

सिंघवी ने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि बीजेपी द्वारा चुनाव बाद किए गए गठबंधन की वजह से बीजेपी ने सरकार बनाई थी और सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस विपक्ष में बैठी। सिंघवी ने राज्यपाल द्वारा येदियुरप्पा को 15 दिन का समय देने पर भी सवाल उठाए और पूछा कि शपथ दिलाने की इतनी जल्दी क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा, ‘क्या ऐसा नियम नहीं है कि सबसे बड़ी पार्टी अगर बहुमत साबित कर सकती है तो उन्हें सरकार बनाने का मौका ना दिया जाए? बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए उसे ही मौका मिला, जेडीएस और कांग्रेस का गठबंधन चुनाव के बाद हुआ है।

जस्टिस बोबडे ने सिंघवी से पूछा, ‘आप कैसे जानते हैं कि येदियुरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए विधायकों की लिस्ट नहीं दी है?’ जस्सिट बोबडे ने यह भी पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को रोक सकती है? इस पर सिंघवी ने कहा कि पहले भी ऐसा हो चुका है।

कोर्ट ने अभिषेक मनु सिंघवी से यह भी पूछा, ‘राज्यपाल ने जिस लेटर से बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया वह कहा हैं।’ अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी मांग की कि शपथ ग्रहण परसों रखा जाए।

वहीं बीजेपी की ओर से पहुंचे पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी बोले कि राज्यपाल को पार्टी ना बनाएं। रोहतगी ने यह भी तर्क रखा कि राज्यपाल द्वारा विवेक के धारा पर लिए गए फैसले परे कोई कोर्ट रोक नहीं लगा सकती है।

याचिका में आखिर है क्या?
कांग्रेस और जेडीएस की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया, ‘राज्यपाल द्वारा बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने के फैसले को रद्द किया जाए या फिर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए न्योता दें क्योंकि हमारे पास बहुमत के लिए जरूरी 112 से ज्यादा विधायकों का समर्थ है।’

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