भाषा संस्कृति विभाग के सौजन्य से तुंगल नाटी के उत्थान पर कार्यशाला का आयोजनimg-20180608-wa0035

*विनोद चढ़ा बिलासपुर*

जिला भाषा, संस्कृति अधिकारी, मंडी के तत्वावधान में जिला के कोटली में तुंगल नाटी के उत्थान पर एक कार्यशाला एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में स्थानीय संस्कृति व क‌ला प्रेमियों ने भी भाग लिया।

जिला भाषा, संस्कृति अधिकारी श्रीमती रेवती सैनी ने बताया कि इस कार्यशाला एवं गोष्ठी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य मंडी जिला के तुंगल क्षेत्र की प्राचीन तुंगल नाटी को संरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि तुंगल क्षेत्र में सदियों से यह नाटी विवाह, जन्म उत्सव व इस तरह के अन्य आयोजनों में प्रस्तुत की जाती रही है। उन्होंने कहा कि नाटी के बारे में वर्तमान युवा पीढ़ी को जागरूक करने व इसके विविध पहलुओं को संकलित करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए इस नाटी से जुड़े प्रबुद्ध लोगों से भी सम्पर्क किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से परा स्नातक (एम.फिल.) की डिग्री कर रही मंडी की स्थानीय निवासी मंजुला कुमारी ने इस नाटी के सांगीतिक पहलुओं पर शोध कार्य भी प्रारंभ किया है। इसमें इस नाटी के इतिहास, इसके गीत-संगीत, ताल व वाद्यों सहित विविध पहलुओं पर शोध कार्य किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के प्रयासों से तुंगल नाटी को संरक्षित करने के अतिरिक्त इसे प्रदेश व देश में नई पहचान तथा.लोकप्रियता भी हासिल हो सकेगी।

कार्यशाला में उपस्थित शोधकर्त्री मंजुला कुमारी ने कहा कि मंडी की लोक संस्कृति काफी समृद्ध है और यहां के पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की नाटियां प्रचलित हैं। उन्होंने कहा कि तुंगल क्षेत्र की इस नाटी के बारे में वर्तमान में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनका प्रयास है कि ‌शोध कार्य के माध्यम से वे तुंगल नाटी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त कर इसके विभिन्न पहलुओं को संकलित करें। इसके लिए तुंगल के कला प्रेमियों, नाटी से जुड़े नर्तकों, बजंतरियों व अन्य प्रबुद्ध लोगों का भरपूर सहयोग उन्हें प्राप्त हो रहा है।

इस अवसर पर संस्कृति प्रेमी सर्वश्री चमन ठाकुर, अरूण कुमार, रूप सिंह, बृजलाल ठाकुर, भीम सिंह, ठाकुर सिंह, चेतराम, लाल सिंह, महेश, बीरी सिंह, चरणदास, बालम राम, तिलक राज, सुनील, केवल राम, सोमदत्त व शेर सिंह इत्यादि उपस्थित थे।

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