केंद्र ने देश भर में 244 जिले किए शामिल, लिंग अनुपात शिक्षा स्तर सुधारने के लिए विशेष कार्यक्रम !!img-20180609-wa0018

*विनोद चड्ढा बिलासपुर*

हिमाचल प्रदेश के तीन जिलों के बाद अब पांच नए जिलों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया जाएगा। केंद्र सरकार ने देश भर में 244 नए जिलों को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाने के लिए चयनित किया है। इसमें हिमाचल के पांच नए जिलों को भी अभियान चलाने के लिए शामिल किया गया है। प्रदेश के ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा जिला के पहले और दूसरे चरण में चयन के बाद काफी अधिक सुधार हुआ है। अब राज्य के शिमला, सोलन, मंडी, बिलासपुर और सिरमौर में अभियान को शुरू किए जाने को चुना गया है।

उक्त चयनित जिलों में बेटियों के लगातार गिरते लिंग अनुपात बढ़ाने और लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने को विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। 22 जनवरी, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत देश भर के एक सौ ऐसे जिलों को अभियान के लिए चुना गया था, जहां महिला जन्म दर पुरुषों की अपेक्षा बेहद कम हैं। कम महिला लिंग अनुपात वाले जिलों की सूची में हिमाचल के मात्र ऊना का भी नाम था। इसके बाद दूसरे चरण में देश भर के 61 जिलों को शामिल किया गया। इसमें प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा और हमीरपुर का भी चयन किया गया।

अब महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा हर जिला के उपायुक्त और स्वास्थ्य विभाग सहित सभी विभाग मिलकर बेटियों की सुरक्षा के लिए कार्य करेंगे। वहीं 2011 जनगणना के अनुसार 0-6 आयु में कांगड़ा में एक हजार बेटों में मात्र 876 बेटियां, ऊना में 875 और हमीरपुर में 887 का आंकड़ा है। विभाग के अनुसार अब इनमें सुधार हुआ है। वहीं नए शामिल जिलों में सोलन 899, बिलासपुर में 900, मंडी 916, शिमला में 925 और सिरमौर का 928 आंकड़ा है, जिसमें अब अभियान से सुधार किए जाने के प्रयास किए जाएंगे। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल कल्याण विभाग कांगड़ा रणजीत सिंह ने बताया कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में केंद्र से 244 नए जिलों का चयन किया गया है।

इसमें प्रदेश के पांच जिले शामिल किए गए हैं।

मुन्निए दी धाम से संदेश !पहले व दूसरे चरण में चयनित कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना में लिगांनुपात बढ़ाने के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत कई विशेष कार्यक्रम चलाए गए। इसके तहत कांगड़ा में मुन्निए दी धाम में बेटी होने पर विशेष धाम का आयोजन किया गया। वहीं सभी जिलों में कॉलर टोन से भी बेटी बचाने और पढ़ाने का संदेश दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने बेटियों को गोद लेकर उनकी शिक्षा का खर्च भी अपने वेतन से वहन किया। इसके अलावा हर पंचायत में गुडा-गुड्डी बोर्ड में बेटे और बेटियों के जन्म का आंकड़ा भी रखा गया।

LEAVE A REPLY