रेशम कीट पालन क्षेत्र में स्वरोजगार से स्वावलंबी बनी सुनीता देवी।img-20180610-wa0159 img-20180610-wa0157

 

 

*विनोद चड्ढा कुठेड़ा*

 

मंडी 10 जून 2018 :- मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बुलंदियों को छूने से कोई भी नहीें रोक सकता। ऐसे दृढ़निश्चयी व्यक्ति को सफलता अवश्य ही मिल जाती है। अपनी कड़ी मेहनत व लगन से सफलता हासिल करने वाली करसोग विकास खण्ड के वथरौण गांव की निवासी श्रीमती सुनीता देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज वह न सिर्फ स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनी है बल्कि क्षेत्र की दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी है।

कभी श्रीमती सुनीता देवी, अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का भी बड़ी मुष्किल से पूरा कर पाती थी और आज न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि पड़ोस की 40-50 युवतियों तथा महिलाओं  को स्वावलम्बी बनाने की राह दिखा रही हंै।

सुनीता देवी, का जन्म एक निर्धन परिवार में हुआ है। माता-पिता खेतीबाड़ी व मेहनत मजदूरी से परिवार का जीवन यापन करते थे। उसे बचपन से ही पढ़ने की चाह  थी लेकिन संसाधन बिल्कुल न के बराबर ही थे। पढ़ाई की चाहत ने उसको आत्म निर्भर बनने की राह दिखाई। पढ़ाई के षौक में गुरबत भी अपना रंग नहीं जमा सकी और जैसे तैसे उसके माता-पिता ने राजकीय वरिश्ठ माघ्यमिक पाठषाला मैहन्डी से दस जमा दो की षिक्षा तो दिलाई लेकिन स्नातक स्तर की पढा़ई दिलाने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था। पढ़ाई करने के बाद परिवार का सहारा बनने के लिए रोजगार की तालाष आरंभ की तथा वर्श 2011 में आई0सी0डी0एस के माध्यम से एक स्वंय सहायता समूह का गठन किया। उसके बाद रेषम कीट पालन का सुन्दर नगर में प्रषिक्षण लिया।

प्रषिक्षण प्राप्त करने के बाद सुनीता देवी ने वर्तमान में महिला मण्डल जावण तथा स्वंय सहायता समूह लक्ष्मी तथा आदर्ष की 40-50 महिलाओं को साथ जोड़कर रेषम कीट पालन का काम आरम्भ किया है। सुनीता देवी आज न केवल स्वंय रोजगार कमाकर आत्मनिर्भर हुई है अपितु क्षेत्र की 40-50  महिलाओं को रेषम कीट के बारे में जानकारी देकर आत्मनिर्भर बना रही हंै।

सुनीता देवी का कहना है कि हिमाचल प्रदेष सरकार महिलाओं, युवकों, गरीबों तथा बेसहारा लोगों के उत्थान के लिए प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेष की युवा षक्ति के हाथ में काम हों। हिमाचल प्रदेष में रेषम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए सेरीकल्चर क्लस्टर बनाए गए हैं तथा रेषम उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए रेषम साथी भी नामित किए गए हैं। प्रदेश सरकार की योजनाओं के बूते ही वह आज आत्म निर्भर हो पाई है। रेशम कीट पालन को अपनाकर वह स्वरोजगार से जुड़ी हैं और क्षेत्र की दूसरी महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर रहीं है।

दच्छैण गांव की ही राधा देवी, रक्षा देवी, देविन्द्रा कुमारी, प्रेमी देवी, षाड़ी देवी, सरीता देवी रामप्यारी, रीतादेवी तथा बेगीराम का कहना है कि  आज युवाओं को घरद्वार पर प्रदेष सरकार सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। वेरोजगार युवा को सरकारी नौकरी के स्थान पर रेषम कीट पालन जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैंै। उनका कहना है कि षहतूत के पौधे जहां रेषम के कीट के आहार के काम आते हैं वहीं पर दुधारू पशुओं के बारे में भी इनका प्रयोग किया जा सकता है तथा  पर्यावरण को साफ सुथरा बनाए रखने में भी सहायक होता है। नौकरी प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा के युग में वेरोजगार युवक तथा युवतियां 30-45 दिनों के अन्दर रेषम के कीट पालन करके माह में 15 से 20 हजार रूपये की  आमदानी प्राप्त कर सकते हैं।

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