घुमारवीं में थाली में परोसी जा रही धाम

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*विनोद चड्ढा कुठेड़ा*

 

 

घुमारवीं —घुमारवीं में होने वाले समारोहों में स्टील की थालियों में लोगों को खाना परोसकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया जा रहा है।  समारोहों में पत्तलों के स्थान पर इस्तेमाल करने के लिए शिव शरण श्रीराम लंगर कमेटी समारोह में बिना किसी शुल्क के स्टील की थालियां व गिलास उपलब्ध करवा रही है। इससे जहां लोगों को धन की बचत हो रही है, वहीं पर्यावरण को भी बचाया जा रहा है। घुमारवीं में इन दिनों आयोजित होने वाले समारोहों में स्टील की थालियों व गिलासों का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है।  जानकारी के मुताबिक घुमारवीं में शिव शरण श्रीराम लंगर कमेटी ने 700 स्टील की थालियां व 700 स्टील के गिलास की व्यवस्था कर रखी है। घुमारवीं में किसी के घर पर भी यदि समारोह का आयोजन किया जाता है, तो उसमें कमेटी इन थालियों व गिलास को बिना किसी चार्ज के उपलब्ध करवा रही है। थालियां व गिलास ले जाने के लिए कमेटी ने सिर्फ एक शर्त निर्धारित कर रखी है कि जितनी भी थालियां व गिलास समारोह को ले जाएंगे, कमेटी को उतनी ही वापस करनी होती है। यदि समारोह में कोई थाली या गिलास गुम हो जाए, तो आयोजक को उतने ही थालियां व गिलास देने होते हैं। हालांकि कमेटी पिछले कई सालों से थालियां व गिलास लोगों को लंगरों व समारोहों के लिए उपलब्ध करवा रही है, लेकिन अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पर्यावरण दिवस पर थर्मोकोल पत्तलों व गिलासों को बंद करने के ऐलान के बाद इनकी महत्ता अधिक बढ़ गई है। कमेटी के सदस्य श्याम लाल शर्मा ने बताया कि समारोहों के लिए लोगों को स्टील की थालियां व गिलास निःशुल्क दिए जाते हैं। घुमारवीं में अब तक कई समारोहों में इन थालियों व गिलासों का लोग इस्तेमाल कर चुके हैं। इससे जहां लोगों का पत्तलों पर खर्च किया जाने वाले धन की बचत हो रही है, वहीं पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया जा रहा है। हालांकि कमेटी इस पुनीत कार्य के लिए पिछले कई सालों से सक्रिय है, लेकिन थर्मोकोल पर मुख्यमंत्री के बैन के ऐलान के बाद इसकी महत्ता बढ़ गई है।

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