एसीसी प्रबन्धन की मनमानी को लेकर मजदूर रतनलाल ने सोचा आत्महत्या का फैंसला img-20180618-wa0214!! !!

 

*विनोद चड्ढा कुठेड़ा*

 

एसीसी भामस के ठेकेदार मजदूरों द्वारा एसीसी प्रबन्धन द्वारा मीडिया में जाने पर नोटिस बोर्ड में दी गई चेतावनी को लेकर कम्पनी प्रबन्धन के खिलाफ जहां पर भारी रोष है वही पर एसीसी इंटक कर्मचारी कम्पनी की मनमानी को लेकर एक मजदूर आत्महत्या जैसा निर्णय लेने पर मजबूर है। एसीसी बरमाणा मे औसती आधार पर 1 नवम्बर 1993 से कार्यरत कर्मचारी रतनलाल टोकन नम्बर 81176 का कहना है कि 25 वर्षो से वह

कारखाने में प्रमोट होकर मैकेनिकल विभाग में कार्यरत था परन्तु 23 मई 2018 को कम्पनी ने उसे प्रमोसन देने की जगह बी ग्रेड डीजल मैकेनिक से ग्रिसर बना दिया।

 

25 वर्षो में जहाँ पर उसकी प्रमोशन होती रही वही पर 23 मई को उसे ग्रिसर का कार्य देकर प्लांट में सभी मशीनरियों में ग्रीस देने का कार्य सौंप दिया जोकि उसके लिए मानसिक आघात बन चुका है। उसका कहना है कि वह गेरेज विभाग में कार्य कर रहा है जिस कार्य को लेकर वह अनभिज्ञ है। उसका कहना है कि इस बारे में उसने एसीसी इंटक प्रधान चैनसिंह ठाकुर को भी बताया परन्तु उन्होंने उसकी  बात को अनसुना कर दिया जिस कारण उसने जिलाधीश,एवम लेबर कमिश्नर शिमला को भी पत्र भेजा और प्रदेश मुख्यामन्त्री से भी कम्पनी द्वारा किये जा रहे इस शोषण को लेकर सम्पर्क साधा परन्तु आज तक कोई सुनवाई नही हुई जिस कारण वह मानसिक रूप से भारी परेशान है। उसका कहना है कि वह यदि तँग आकर कोई भी आत्मघाती कदम उठाता है तो उसके लिए एसीसी प्रबन्धन सहित प्रदेश सरकार भी जिम्मेदार होगी।

 

जब इस बारे में एसीसी इंटक प्रधान चैन सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वी आर एस लेने की वजह से काफी मजदूर जा चुके है परंतु कम्पनी शीघ्र ही नए लोगो को ट्रेनिग देकर उनकी जगह नियुक्त करेगी और रतनलाल को फिर से मैकेनिकल विभाग में ही रखा जाएगा।

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