बेटी बचाओ बेटी पढाओं अभियान को पुलिस व मायके वालों ने धता बतादी। और जान से ही मार डाली अपनी ही बेटी

 

*विनोद चड्ढा कुठेड़ा*

 

कोलर गांव की महिला के अपहरण और हत्या के बाद से साफ तौर पर जाहिर हो गया है कि केन्द्र की योजना बेटी पढाओ बेटी बचाओं अभियान को पुलिस के कुछ लोगो भाजपाईयो व मायके वालोें ने सोची समझी साजिश के तहत मार डाला। कसूर सिर्फ इतना था कि वह किसी के मोहपाश में फंस गयी थी। भाजपाईयो के उपर गाज इसलिये शहर के बुद्धिजीवी वर्ग गिरा रहे है कि जनता को याद है कि कोटखाई की गुडिया प्रकरण में भाजपाईयो ने पूरे जोशो खरोश के साथ मामले को हवा दी थी और प्रदेश भर मे धरना प्रदर्शन हुए थे। उस समय विधानसभा अध्यक्ष डा0 राजीव बिन्दल विपक्ष में थे और डीसी सिरमौर के कार्यालय में जमीन पर ही बैठ गये थे फिर बाद में माफी भी मांगी थी।

पुलिस पर आरोप लग रहे है कि पुलिस ने लीपापोती करने की पूरी जुगाड फिट कर रखी है ऐसा महिला के अधिवक्ता का कहना है हमारा नही। अधिवक्ता आसिफ अंसारी ने मीडिया के समक्ष व्यान देते हुए कहा है कि जिस समय एसडीएम कार्यालय से अपहरण हो रहा था उन्होने तुरन्त ही पुलिस थाने में फोन करके सूचित किया था और पुलिस चाहती तो देर रात्रि में भी कार्यवाही कर महिला की जान बचा सकती थी। किन्तु ऐसा नही हुआ। और अधिवक्ता को टके का जवाब दे दिया गया कि ”मै क्या करूं” छन छन कर आ रही सूचनाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि जिस प्रकार की लकडियो में शव को जलाया गया उससे शव पूरी तरह नही जल सकता ऐसी समूचे समाज में चर्चा है।

जहां एक ओर बेटी पढाओ बेटी बचाओं अभियान पूरे यौवन परहै वही देवभूमि में महिला का अपहरण और फिर उसके बाद हत्या और फिर शव का अन्तिम संस्कार चिन्ता की लकीरें तो उत्पन्न कर ही रहा है। इससे भी ज्यादा हैरत की बात तो यह भी है कि गुडिया प्रकरण में हो हल्ला मचाने वाले अब आखिर कार क्यो चुप्पी साधे हुए है। वह भी किसी की गुडिया थी और यह भी किसी की गुडिया ही थी। तो फिर इतना भेदभाव क्यों गुडिया सब की एक समान होती है।

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