img-20180806-wa0004 img-20180806-wa0014कौशाम्बी
उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले में लंबे समय से चला आ रहा अधिकारी बनाम जनप्रतिनिधि विवाद अब अधिकारी बनाम अधिकारी की तरफ भी बढ़ रहा है।
यूँ तो अधिशाषी अधिकारी अंकिता पटेल किसी की भी नही सुनती है आज उन्होंने उपजिला मजिस्ट्रेट को अभी अपनी पकड़ की हनक दिखा दी
आज अचानक तमाम नगरवासी नगर पंचायत पहुंच रहे थे खबर मिलने पर सभासदो ने जब जानना चाहा तो उन्हें पता लगा कि अधिशासी अधिकारी ने कीच मुनादी करवाई है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए मिलकर आवेदन कराये जिसकी जानकारी अध्यक्ष व सभासदों नही दी गयी
जिससे अध्यक्ष व सभासद नाराज़ हुए और उन्होंने ईओ से इस बाबत चर्चा करनी चाही जिसपर अधिकारी मिलने को तैयार नही हुई बार बार अध्यक्ष द्वारा कर्मचारियों को बुलाने पर जब वो भी नही पहुंचे तो एक वरिष्ठ सभासद जिनकी उम्र लगभग 60 वर्ष होगी शकील अहमद और सभासद साथियों के साथ अधिकारी के कार्यालय पहुँचे उन्होंने कर्मचारियों के रवैये पर नाराज़गी जाहिर की जिस पर अधिशाषी अधिकारी ने उन्हें चप्पल से पीटने की बात कही जिससे माहौल गर्म हो गया आनन फानन उपजिलाधिकारी सहित तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे और जब उपजिलाधिकारी ने मौके पर फ़ोन करके ईओ को बुलाया की मामले की सही जानकारी हो सके तो तमाम सभासदों के बीच अधिशासी अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी का फोन यह कह कर काट दिया कि अभी “मूड नही है बात करने का”
जिसके बाद सभासदो ने कहा कि जब आप से इसतरह बात कर रही है तो हमारी क्या स्थिति होगी यह आप समझ सकते है
उधर अधिशाषी अधिकार एक दो मीडिया प्रतिनिधि के अतिरिक्त किसी से भी मिलती नही है
उनकी माने तो सभासद आये दिन उनके साथ अभद्रता करते है वो भय के माहौल में नौकरी कर रही है लेकिन कुछ भी हो वो कौशाम्बी से जाने को तैयार नही है उनका कहना है कि वो कर्तव्य को लेकर यहाँ से नही जाना चाहती
जबकि लगातार जारी महाभारत कुछ और ही तरफ इशारा कर रही है
कुछ राजनीतिक लोगो इस मामले को साम्प्रदायिकता के रंग में भी रँगने को भी तैयार है अचानक भारी संख्या में दो सम्प्रदाय के लोगो का एकत्र होना और धार्मिक नारे लगाया जाना निश्चित ही कुछ और कहानी बना रहा है।
ऐसे में अगर जयचंद्र अपनी कहानी बना ले गए तो तमाम अधिकारी व जनता को भारी नुकसान होगा इससे इंकार नही किया जा सकता है।

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