हिन्द के वासियों के लिए सावन का यह पखवारा सबसे दुखद पखवारा रहा जब एक ही वर्ष जन्मे भारत मा के दो अनमोल राजनीति के महारथी
पंचतत्व में विलीन में हो गए भारत के सबसे दक्षिण प्रान्त के महान नेता पूर्व मुख्यमंत्री एम0करुणानिधि की मृत्यु से अभी राहत ही नही हुई कि भारत के महान नेता पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी वाजपेयी भी इस दुनिया से रुख़सत हो चले
आज यूँ तो सम्पूर्ण राष्ट्र शोकाकुल है वही बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने भी अटल जी की मृत्यु को अपूर्णीय क्षति तो बताई लेकिन साथ ही उन्हें गलत पार्टी का सही नेता बतायाimages-13_1534427903672 images-12_1534427903696K
बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की
पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद मायावती ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री व बीजेपी के
मार्गदर्शक मण्डल के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त
किया है। वे लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे तथा पत्रकारिता से
अपना जीवन शुरू करने वाले श्री बाजपेयी उत्तर प्रदेश में लखनऊ संसदीय सीट सहित
कई बार सांसद चुने गये।
मायावती ने आज एक शोक सन्देश में कहा कि कवि मन वाले
श्री वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन मेंयोगदान को हमेंशा ही याद किया जाता रहेगा।
वे लगभग चार दशको तक देश की राजनीति में सक्रिय रहे।
वे देश के एक ऐसे नेता थे जो भारतीय जनसंघ व बाद में इसके नये अवतार
बीजेपी में रहने के बावजूद व्यापक स्तर पर सम्मान की दृष्टि से देखे जाते थे क्योंकि
उन्होंने पार्टी व सरकार में रहते हुये दोनों ही स्तर पर अनेक मौकों पर पार्टी हित से
ऊपर उठ कर समाज व देश की भलाई के लिये काम करने का प्रयास किया।
इसीलिये उनके बारे में यह कहा जाता था कि वे सही सोच वाले नेता थे लेकिन हमेंशा
ग़लत पार्टी में रहे। देश के सांसद, केन्द्रीय मंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में भी
उनके अमूल्य योगदान को लोग लगातार याद करते रहे हैं और आगेभी उन्हें इसके
लिये याद करते रहेंगे।
बीजेपी की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी उन्हें व उनके कार्य काल तथा
खासकर पड़ोसी देश पाकिस्तान व कश्मीर सम्बधी उनकी नीतियों को लोगो ने लगातार
याद किया और लोगों का यह मानना है कि अगर वे स्वस्थ्य रहते तो बीजेपी शायद
कभी भी इतनी जनविरोधी, संकीर्ण, संकुचित, अहंकारी व विद्वेषपूर्ण नीति वाली पार्टी
नहीं हो सकती थी जितनी की आज हर तरफ नज़र आती है और जिससे देश में हर
तरफ शान्ति व सद्भाव के बजाय हिंसा व अफरातफरी का माहौल है। इसलिये भी उन्हें
व उनके कार्य काल को लोग और भी ज्यादा याद करते रहे। कुदरत से प्रार्थना है कि
वह उनके अनुयाइयों को उनके निधन के दुःख को सहन करने की शक्ति द।

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