नई दिल्लीः झाड़ू चलाकर पीएम मोदी ने चुनाव जीतने की तैयारी की है. आज स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम की शुरुआत मोदी ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की मूर्ति के पास से की. पीएम मोदी ने बाबा साहेब की मूर्ति के पास झाड़ू लगाई. बच्चों को बाबा साहेब बनने के लिए प्रेरित किया गया और इसके अलावा ये सब कार्यक्रम आंबेडकर नाम के स्कूल से किए गए. ऐसे में ये चर्चा जोरों पर है कि 2019 जीतने के लिए मोदी ने आंबेडकर प्लान बनाया है.

 

झाड़ू चलाकर दिया सियासी संदेश
पीएम मोदी ने झाड़ू से सफाई करके देश को स्वच्छता का संदेश दिया लेकिन इस जगह से मोदी ने आज देश को एक और संदेश देने की कोशिश की है और वो संदेश सियासी है. पीएम मोदी जिस जगह पर झाडू लगा रहे हैं उस जगह बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की आदमकद मूर्ति लगी हुई है और इसी मूर्ति के नीचे से मोदी ने सफाई की शुरुआत करके स्वच्छता के साथ ही सियासत का भी संदेश दिया है

 

स्वच्छता अभियान की शुरुआत के लिए चुना आंबेडकर स्कूल
2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती है और उससे पहले आज से स्वच्छता अभियान की शुरुआत की गई है. मोदी ने जिस जगह झाड़ू लगाई वो आंबेडकर स्कूल है. पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम की शुरुआत के लिए दिल्ली के पहाड़गंज का ये आंबेडकर स्कूल चुना आंबेडकर स्कूल चुनने के पीछे मोदी का प्लान क्या हो सकता है वो कई तस्वीरों से साफ होता दिख रहा है.

 

इस स्कूल के कार्यक्रम में जो तीन तस्वीरें उभरकर सामने आई उसमें मोदी आंबेडकर मूर्ति के पास झाडू लगाते दिखे और दूसरी तस्वीर में बच्चों को आंबेडकर जैसा बनने को कहते दिखे और तीसरी तस्वीर में आंबेडकर के लिए नारे लगते रहे. यानी गांधी जयंती तक चलने वाले स्वच्छता के इस कार्यक्रम में फोकस आंबेडकर थे. असल में बाबा साहेब आंबेडकर के जरिये पीएम मोदी एससी-एसटी वोट बैंक पर नजर जमाए हुए हैं. कुछ कारणों से ये समुदाय बीजेपी से नाराज चल रहा है. मोदी को मालूम है कि इस समाज की नाराजगी उन्हें महंगी पड़ सकती है.

 

एससी-एसटी के वोटों का खेल
सीएसडीएस के आंकड़े बताते हैं कि 2014 में बीजेपी को एससी-एसटी के 24 फीसदी वोट मिले थे जबकि कांग्रेस को 19 और बीएसपी को 14 फीसदी वोट मिले थे. इससे पहले के चुनावों में बीजेपी को महज 12-14 फीसदी एससी-एसटी वोट मिलते थे. 2014 में इस वोट का असर ये हुआ कि मायावती जैसी नेता की पार्टी खाता नहीं खोल पाई लेकिन इस बार मायावती ने बीजेपी को हराने के लिए पुख्ता प्लानिंग की है. इसी प्लानिंग के तहत यूपी में माया ने अखिलेश से हाथ मिलाने का फैसला किया है और ये प्लानिंग कामयाब रही तो फिर बीजेपी को मुश्किल हो जाएगी.

 

देश में करीब 21 फीसदी एससी-एसटी आबादी है और सबसे ज्यादा इनकी आबादी यूपी में हैं जहां कुल आबादी का करीब 21 फीसदी एससी-एसटी हैं. पंजाब की आबादी में 32 फीसदी एससी-एसटी हैं और महाराष्ट्र में इनकी आबादी कुल आबादी का करीब 12 फीसदी है. यही वजह है कि बीजेपी इन दिनों आंबेडकर का नाम लेकर ही अपनी तमाम राजनीति का श्रीगणेश कर रही है. इससे पहले पिछले हफ्ते जब बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक हुई तब भी पार्टी ने आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में कार्यक्रम किया था.

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