SUNAMI NEWS TV BILASPUR_बिलासपुर। विरोधियों के द्वारा लगाए गए आरोपों पर एल्डरमैन मकबूल ने दिया़ जबाब..

बिलासपुर।
अपने विरोधियों के द्वारा लगाए गए आरोपों पर एल्डरमैन मकबूल ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस बात के लिए मैं शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उन्होंने माननीय मंत्री अमर अग्रवाल जी के चरित्र को पहचाना और उसका गुणगान किया।

वर्ना कांग्रेस के इशारे पर जो कुछ भी हो रहा है, उसमें मंत्री जी का गुणगान कांग्रेसी नहीं कर पाते। दरअसल मंत्री जी का अक्स ही ऐसा है, कि विरोधी भी उनके सामने चरित्र के मामले में नतमस्तक रहते हैं।

मकबूल ने कहा कि, अब मैं अपने ऊपर लगे आरोपों पर बात करता हूं। मुझे पता है कि आरोप कहां से और किस तरह से लगाए जा रहे हैं। जो लोग मेरे संदर्भ में दरगाह मस्जिद मदरसा में कब्जा करने की बात कह रहे हैं, उन्हें पहले वक्फ़ बोर्ड और न्यायालय के कागज़ात को देख लेना चाहिए। इस प्रक्रिया में मैं कहीं भी नहीं हूं। यदि विरोधी इसे मेरी सफ़ाई मानते हैं, तो यह उनकी ग़लतफहमी है क्योंकि मैं उनके लिए जवाबदेह नहीं हूं। लेकिन सार्वजनिक जीवन में जो लोग चरित्र पर सवाल उठाते हैं, उनका चरित्र ख़ुद कितना पाक-साफ़ है,
यह उन्हें देखना चाहिए। गरीबों की ज़मीन हड़पने में और गुंडे मवालियों की दलाली करने के गोरखधंधे में लिप्त लोग मुझ पर आरोप इस कारण लगा रहे हैं क्योंकि मुस्लिम समाज में वे एक पढ़े लिखे ऐसे शख़्स को आगे नहीं बढ़ने देना चाहते, जो समाज के निचले तपके के साथियों को हाथ पकड़कर आगे लाने का काम करे। ऐसा करने से उन लोगों की दुकान सिमटने लगेगी। मेरा मकस़द अपने समाज के ग़रीब भाई-बहनों की शिक्षा के क्षेत्र में जो मदद हो सकती हो, करना है।
विरोधियों ने जो आरोप लगाए हैं, उनमें कहीं भी वे खुलकर सामने नहीं आ पा रहे। इसका कारण है कि सच उनके साथ नहीं है। मैं डंके की चोट पर कहता हूं कि अगर उनमें हिम्मत है, तो सामने आए, कोर्ट की लड़ाई लड़ने के लिए मैं तैयार हूं।
माननीय मंत्री अमर अग्रवाल जी की मजबूत होती टीम से वे लोग चिंताग्रस्त हैं और इस टीम में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं। हाजियों का इस्तक़बाल करना कौन सा जुर्म है और ये सिर्फ मेरी मर्जी से हो रहा था, ऐसा तो है नहीं। इसमें सारे हाज़ियों की रज़ामंदी थी, समाज के लोगों की रज़ामंदी थी, तब कार्यक्रम तय हुआ। विरोधी कहते हैं समाज में धाक बनाने के लिए मकबूल ऐसा कर रहा है। इन शब्दों को देखिए। धाक बनाने का काम गुंडे मवालियों का होता है, पढ़ी-लिखी कौम इस तरह के लफ़्जों से परहेज करती है। मैंने कभी धाक बनाने की कोशिश नहीं की, हां, इस बात को मानता हूं कि मैंने लोगों के दिल में अपनी जगह बनाने की कोशिश ज़रूर की है, और अगर न बना पाया हूं, तो कहीं न कहीं मेरी कमज़ोरी होगी। मैं उसे दूर करूंगा। अमर अग्रवाल जी बेदाग छवि के हैं और पिछले 20 सालों से वे सर्व धर्म समभाव का निर्वहन कर रहे हैं, यह विरोधी ख़ुद कह रहे हैं, मैं भी यही कहना चाहता हूं। क्या ऐसे व्यक्ति का हाथ और साथ देना मेरे लिए गुनाह हो गया। जो समाज को, शहर को, राज्य और देश को आगे ले जाने की बात करे, उसके साथ उठना-बैठना गुनाह-ए-अज़ीम हो गया। मुझे ख़ुदा पर ऐतबार है, जो घटिया किस्म की बातें हो रही हैं, उसका इंसाफ़ वही करेगा।
धर्मों की आस्था का प्रतीक लुतरा दरगाह में बाबा इंसान अली के वंशजों द्वारा चुनी गई कार्यरत कमेटी को गलत तथ्यों के आधार पर वक्फ बोर्ड ने भंग किया है। इस वक्फ़ बोर्ड में मैं कहां हूं। मेरी इतनी हैसियत नहीं कि कानून से ऊपर उठकर इंसाफ के साथ खिलवाड़ कर सकूं। जो हुआ होगा या हुआ है, वह दस्तावेजी कागज़ातों के आधार पर हुआ है। अग़र उसमें कुछ ग़लत है, तो कोर्ट है, हाईकोर्ट है, सुप्रीम कोर्ट है। यहां जाने की बजाय मकब़ूल को गाली देने से क्या हासिल होगा। आज मुझे अपने बड़ों की एक बात ज़रूर याद आ रही है कि जब तुम्हारे विरोधी तुम्हें गाली देने लगें, लगातार तुम्हें नीचा दिखाने की कोशिश करने लगें, तो एक बात समझ लेना कि तुम उनसे बेहद ऊंचाई पर खड़े हो। इस मायने में मैं ऐसा मान सकता हूं। क्योंकि मेरी सोच उन जैसी बिल्कुल नहीं। लुतरा शरीफ़ की कमेटी अग़र भंग हुई है, तो वहां कुछ गड़बड़ियां मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा इस बारे में मुुझे और कुछ जानकारी नहीं। रही बात मंत्री जी को वोट दिलाने की, तो मंत्री जी का नाम इतना बड़ा है, कि मकब़ूल उनके सामने एक छोटा सा शख़्स है। अच्छे का साथ हर अच्छा आदमी देना चाहता है और मुस्लिम समाज में अच्छे लोग हैं, लिहाजा सब उनका साथ देंगे। इसके लिए छोटी सोच वालों से सर्टिफिकेट लेने की ज़रूरत नहीं है।

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