रीवा । 200 से ज्यादा की संख्या में गाय जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है और इधर नेता मंत्री बना रहे हैं चुनावी रणनीति..

रीवा जििला के बकिया बराज में 200 से ज्यादा की संख्या में गाय जीवन और मौत के बीच जूझ रही हैं और इधर नेता मंत्री लगे हैं चुनावी रणनीति में अगर देखा जाए तो गांव मे गाय को गोधन कहा जाता था लेकिन अब अपने पालकों के लिए समस्या का सबब बन गई है अब लोग इतने संवेदनहीन हो गए हैं की गाय को माता तो दूर जानवर भी मानने के लिए तैयार नहीं है लोग जहां अपने पाल को से तिरस्कृत गाय दूसरे गांवों में भटक रही थी वहीं बकिया बराज के खाली नहर में सूत्रों के अनुसार ग्रामीणों ने जानबूझकर 200 से ज्यादा गायों को नहर में ढकेल दिया है । जहा उन गायो को ना भूसा मिल रहा है और ना ही चारा पानी जहां पर गाय की हालत दिन प्रति दिन बिगड़ती जा रही लगभग 3 से 4 की संख्या में मवेशियों की भूख प्यास की बजह से मौत हो चुकी है और आधे से जादा की संख्या में गाय चोटिल होकर उसी नहर में पड़ी हुई हैं और उनको खाने के लिए ना तो चारा है नाही पानी वहीं दूसरी ओर उन्हें जिंदा ही कौवे और कुत्ते नोच नोच कर खा रहे हैं और गाय दर्दनाक मौत का शिकार हो रही हैं लेकिन ना ही प्रशासन और ना ही गांव वालों को इसका दर्द हो रहा है जबकि 40 से 50 की संख्या में स्वयंसेवी संगठन के लोग जब रीवा से पहुंचे तो ना तो प्रशासन और ना ही गो अभ्यारण के अधिकारियों ने इसमें कोई मदद नही की सभी ने एक दूसरे का बस नंबर ही देते रहे । एक तरह से कहा जाए तो सभी अपने – अपने से पल्ला झाड़ते नजर आए वहीं दूसरी ओर पुलिस ने तो यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि यह रीवा जिला का मामला नहीं है संबंधित जिला को सूचित करें सवाल यह उठता है कि क्या अब गाय को प्रशासन भी जानवर तक नहीं मान रहा है गौ गंगा की बात करने वाली सरकार भी बोट के आंकड़ों को जोड़ने में लगी हुई है वहीं विपक्ष के लिए भी यह मुद्दा अब नहीं बचा इस संवेदनहीनता में ना जाने अब कितनी गायो की जाने जाएंगी ।

रीवा ब्यूरो संजीत द्विवेदी की रिपोर्ट।

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