SUNAMI NEWS TV_कृषि प्रधान देश मे किसान की हालत गम्भीर ।

संजीत द्विवेदी

आज जिस देश को कृषि प्नधान देश के नाम से जाना जाता है उस देश के किसानो की हलत देख कर अॉखो मे आसू निकल ने लगती है और वही अनाज का भंडार के नाम पर उक्पादन के नाम पर बडे बडे ढीन्ढोरा पीटे जा रहे है लेकिन जब किसानो से संम्पर्क किया गया तो किसानो ने अपने मुखार बिन्दुओ से कहा कि जिस तरह से आज हरगावो से ले कर शहर मुहल्ले तक किसानो की समास्या ही समास्या नजर आ रही है लेकिन किसानो के खातिर कोई ठोस कदम नही उठाया जा रहा है जिससे किसानो की मेहनत का सही दाम मिल सके और किसान भी खुश हाल हो सके और आज उन किसानो से पूछो जिन्होने ने खेती बोया था लेकिन प्नकृति साथ नही दिया तो खेती सूखी कर नष्ट हो गई है औरअन्य जगहो पर खर्च करने के लिए किराया से ले कर भोजन और माहगाई भत्ता मे खर्च किया जा रहा है लेकिन किसानो की खेती सुख कर नष्ट हो गई तो किसानो को क्या मिला और किसान आवाज उठाता है तो फैशन का रूप दिया जाता है धरना प्नदर्शन करता हैतो जाने गमानी पडती है और वही जब गॉवो के किसानो से जानकारी प्नाप्त किया गया तो किसानो ने कहा कि हम सब किसानो से बीमा की राशि जमा कराई जाती है लेकिन जब फसल नष्ट हो जाती है तो बीमा की राशि का भुगतान नही किया जाता है और यह समास्या बहुत ही पुरानी हो चुकी है और बेबसऔऱ मजबूर किसान ऊपर वाले से मदात माग रहा है

आज हर गॉव के किसानो ने सवाल कर रहे है कि गेहू और दोनो का रेट दो हजार रूपाय के करीवन है लेकिन किसान पूछ रहा है कि गेहू से कितना समान तैयार किया जाता है और उसका रेट जैसे मैदा सूझी दलिया और अन्य सामर्गी तैयार किया जाता है लेकिन रेट इन सब का आसमान छु रहा है और किसान अनाज तैयार करता है तो कम दाम क्यो दिया जाता है उस दौरान जब सब्जी के सम्बंध मे किसानो से चर्चा किया गया तो किसानो ने कहा कि जब आसू ब्याज किसान तैयार करता है तो कौडी के भाव किसानो को रेट मिल ता है वल्की सडको पर भी फेकने को मजबूर हो जाते है किसान लेकिन आसू से क्या क्या तैयार किया जाता है जिसका रेट सुनाने से हरानी हो जाती है एक किलो आलू किसान का मुश्किल दस रूपाय किलो विकता है लेकिन एक किलो आलू मे करीवन दस पैकेट चीपस तैयार किया जाता है जिसका रेट पॉच से दस रूपाय पैकेट विकता है और किसान मेहनत करता है लेकिन फायदा किसी और को होता दिख रहा और किसान पारेशानी महसूस आज भी कर रहा ह

 

 

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