उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक प्रतापगढ़ के भदरी राजघराने के उत्तराधिकारी छ बार से लगातार निर्दलीय विधायक चार अलग अलग सरकारों में मंत्री रहे कुंवर रघुराज प्रताप सिंह के समर्थकों ने कल 30 नवम्बर को राजधानी के रमाबाई पार्क में रैली का आयोजन किया जिसमे कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के राजनीति में सफल 25वर्ष के बाद राजनोति में नई रूपरेखा तय करने हेतु एक नए राजनीतिक दल की घोषणा भी की गई।
कुंवर रघुराज के स्वर्ण काल के कार्यक्रम में लाखों की संख्या में तमाम राज्यो बिहार,झारखंड, हिमांचल,असम,बंगाल,दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, सहित नेपाल से उनके समर्थक उपस्थित हुए जिससे कार्यक्रम को सफल मान लिया जाना चाहिए।
कुँवर रघुराज अपने अंदाज में जनता से रूबरू हुए और सभी जाति धर्मो को साथ लेकर चलने की बात दोहराई राजा भैया ने यह भी स्पष्ठ किया कि वो दलित विरोधी नही है जिसका उदाहरण है कि तीन बार से सांसद रहे शैलेन्द्र कुमार उनकी पार्टी के संयोजक है।
बातों बातों में अपनी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के बारे में बात करते समय कुंवर जी से एक चूक हो गयी
उन्होंने सभी जाति व समाज के साथ मिलने की बात को वजनता से जनता के बीच रखा वही राजा ने अपने भाषण में कुंडा विधानसभा क्षेत्र में क्षत्रिय मतदातों की संख्या मात्र 12 हज़ार बताई जो तमाम सर्वे व आकड़ो की हिसाब से बहुत कम है।
NBT की 2012 के चुनाव के समय की खबर के आधार पर देखा जाए तो क्षेत्रमें क्षत्रिय मतदातों की संख्या आज से पांच वर्ष पूर्व भी 37000 हज़ार थी।
इस बयान के पीछे दो बातें हो सकती है या तो कुंवर जी के पास आकंड़े गलत हो जिसकी सम्भावना कम है क्योंकि राजा भैया राजनीति की माहिर खिलाड़ियों में से है।
दूसरी बात जनता के बीच अपनी लोकप्रियता को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने जानबूझकर ऐसा बयान दिया होगा इस सम्भावना से इनकार नही किया जा सकता है।
ख़ैर रघुराज प्रताप सिंह लोकप्रिय है इसके लिए उन्हें ऐसे बयान के सहारे की जरूरत तो नही हो सकती क्योंकि 25 वर्ष से लगातार मिल रही विजय अपने आप मे सबकुछ बयां कर रही है।

बात अगर आगामी आम चुनाव की करे तो राजाभैया ने भीड़ दिखाकर सभी पार्टीयो के सर में दर्द तो कर दिया है लेकिन राजा की मुश्किलें भी पार्टी बन जाने के बाद बढ़ जाएगी क्योकि राजा भैया को पूरे देश मे अपने नेतृत्व में अपने दम चुनाव लड़ना और जितना होगा जो बहुत आसान नही है क्योंकि राजा की राजनीति और कार्यशैली से प्रतापगढ़ व कौशाम्बी इलाहाबाद के कुछ इलाक़े छोड़ दे तो ज़्यादातर आमाव वाकिफ़ नही है

गौरतलब है कि राजा भैया के सम्बंध भाजपा, समाजवादी पार्टी, मुलायम अखिलेश, शिवपाल से अच्छे ही नही बहुत अच्छे है।
ऐसे में राजा के पसंदीदा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से उनके सहयोगी मित्रों को चुनाव लड़ाने व जिताने हेतु किसी न किसी दल से आंतरिक या बाह्य या दोनों समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

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