• ये उतरन नहीं… उपहार है वस्त्रदान- अभियान संजय मतलानी….
  • सुनामी ब्यूरो प्रमुख मुकेश तिवारी(09174310780)
    बिलासपुर । जज़्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा रविवार को एक विशेष आयोजन किया गया जिसे नाम दिया गया “ वस्त्रदान- अभियानरविवार दोपहर शहर की युवाओं की टीम “ जज़्बा ” जो किसी तारीफ़ या इनाम के लिए काम नहीं करती और युवाओं में उसकी ख़ास पहचान है रक्तदान जागरूकता और रक्तदान शिविरों के लिए… उसके सभी सदस्य और शहर के कुछ जागरूक लोगो की टीम पहुची झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले उन गरीब और ज़रूरतमंद लोगों के बीच जिनके पास तन ढकने के लिए कपडे या तो नहीं थे या थे भी तो टुकडो और में थे फटे हुवे थे .. कुछ बुजुर्गों ने तो पेंट को रस्सी से बाँध रखा था…
    जिन्हें देख के हर किसी की आँखे डबडबाई हुई थी !आज़ादी के इतने सालों बाद भी गरीबी और भूख वहीँ की वहीँ बनी हुई है ,ऐसे में समाज के उस वर्ग को आगे आने की ज़रूरत है जिन्हें इश्वर ने सामर्थ्य दिया है उनकी खुद की आवश्यकता से अधिक दिया है !
    टीम जज़्बा ने चुना शहर से लगे झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले उन गरीब लोगों को जो हमारी नज़रों के सामने होकर भी हमेशा से उपेक्षित रहे हैं …..
    रेलवे इंस्टिट्यूट के पीछे जहां हर साल हज़ारो लोग रावण दहन देखने जाते हैं वहीँ बसते हैं शहर के करीब 150 परिवार जो वहां बने कच्चे मकानों और गिरती दीवारों के बीच रहते हैं ! इसी तरह से टीम ने अगली जगह चुनी हेमू नगर की कुष्ठ रोगियों की बस्ती वहाँ जाकर भी इन लोगों ने कपडे और खाने पीने की चीज़ें बाटी, आखरी में टीम के सभी सदस्य पहुंचे मरिमाई सिरगिट्टी के पास की झोपड़ियों में जहां दिल ढलने के बाद रौशनी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है …
    वहाँ ठण्ड से जूझ रहे बुजुर्गों तक कपडे और खाने की चीज़े पहुंचाई गई ! शहर का हर समाज , धार्मिक मंच, राजनितिक मंच अपने अपने लोगो के लिए काम करता है और उन्हें ही सुविधाएं मुहैय्या करवाता है … लेकिन कभी इनकी तरफ किसी ने तरस भरी निगाह तक उठा के नहीं देखा …. जज़्बा ने ना केवल यहाँ के लोगों के लिए वस्त्रदान अभियान चलाया बल्कि उनके स्वास्थ्य का ख्याल करते हुवे वहां 2 डॉ. भी अपने साथ ले गए जिन्होंने उन सभी लोगों का स्वास्थ्य परिक्षण भी किया और उन्हें मुफ्त में दवाएं भी दी जिस से उन्हें ये एहसास हो की वो भी इसी समाज और परिवार क हिस्सा हैं एक अभिन्न अंग हैं , उनकी भी चिंता करने वाला कोई है .. उनकी भी जान की कोई कीमत है उनका होना भी ज़रूरी है !
    शहर में रक्तदान जागरूकता को लेकर अपनी एक अलग पहचान बना चुकी टीम जज़्बा ने ठण्ड के मौसम में बिना कपड़ों के सोने वाले , और गरीब बस्तियों में रहने वाले गरीब लोगों के लिए ये अभियान चलाया जिस से ज़रूरतमंद कम से कम ठण्ड की वजह से तकलीफ ना पायें !
    इस अभियान की शुरुवात के तहत संस्था ने शहर के लोगों से अपने पुराने उतारे (उतरन) हुवे कपडे जो अब उनके लिए अनुपयोगी हो चुके थे उन कपड़ो को जमा किया …
    शहर के हर वर्ग ने सोशल मीडिया पर चलाई जा रही जज़्बा की इस मुहीम का हिस्सा बन कर सिर्फ 15 दिनों में ही करीबन 1000 जोड़ी कपडे जज़्बा तक पहुचाये , संस्था ने उन आये हुवे कपड़ो पर ढेर सारी मेहनत की है !
    संस्था के सभी सदस्यों ने ना सिर्फ उन कपड़ों को अपने हाथो से धोया , बल्कि उन्हें प्रेस करके उन्हें कंपनी से आने वाले नए कपड़ों की तरह पैक भी किया , क्यूंकि जज़्बा के पास आर्थिक मजबूती नहीं है इसलिए सभी सदस्य अपने हाथों से सारे कार्य करते हैं ऐसे हर आयोजन में… ऐसा करने के पीछे संस्था के संयोजक संजय मतलानी ने वजह बताई की भले ही ये कपडे देखने में या हम तक जब आये तो ये किसी की उतरन थे .. लेकिन जब हम किसी ज़रूरतमंद को ये कपडे देंगे तो उस उतरन को उपहार बना कर देंगे ऐसा मकसद था हमारी टीम का… ताकि जो लोग वो कपडे हमसे लेंगे उन्हें ये कपडे लेते वक़्त ये एहसास ना हो की उन्हें किसी की उतरन दी जा रही है !
    कपडे पैक करते वक़्त बहोत सारी बातों का ध्यान रखा गया , जैसे की महिला पुरुष वर्ग के कपडे अलग करना , बच्चों के पड़े अलग करना , गरम कपड़ो को छाटना , कपडे मैले तो नहीं हैं किसी कपडे के बटन या हुक टूटे हुवे तो नहीं हैं , कपडे पहनने योग्य हैं या नहीं हैं , कपड़ो से किसी तरह की बदबू तो नहीं आ रही , उसके अलावा जिस सबसे महत्वपूर्ण बात का ख्याल रखा गया वो है कपडे पैक करते वक़्त साइज़ का ध्यान रखा गया ताकि जब कपडे बाटें जाएँ तब उसी व्यक्ति की मिले जिसके वो काम आ सकते हों , हर जोड़ी को पैक करके उसके ऊपर उसकी साइज़ लिखी गई है !
    शहर की बाकी संस्थाओं की तरह केवल खानापूर्ति करके कपडे फेंक कर देना, या जैसे उन्हें मिलते हैं वैसे ही दे देना बाद में भले वो कपडे लेने वाले के किसी काम ना आयें .. ऐसी सोच के विपरीत टीम जज़्बा ने अपने 1 महीने की मेहनत से जो खुबसूरत रूप दिया है वो देखते ही बनता है !
    1 महीने लगातार जज़्बा के समर्पित सदस्यों ने मेहनत की जिसका परिणाम आज उन गरीब ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंचा जिन तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी बिलासपुर के लोगो ने उन्हें कपडे देते वक़्त दी थी !
    जज़्बा के संस्थापक और संयोजक संजय मतलानी ने बताया की हमारी टीम के सदस्य शहर के हर कोने से हैं हर वर्ग से हैं हर धर्म से हैं जिस वजह से हमें शहर में ज़रूरतमंद और गरीब लोगो की जानकरी आसानी से मिल भी जाती है और हम अपने स्तर पर उन्हें सहायता देने की हर संभव कोशिश भी करते हैं , इसी क्रम में हमारी टीम के कुछ सदस्यों द्वारा ये देखा गया की बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, हनुमान मंदिर और तोरवा के आसपास के क्षेत्रो में कुछ लोग सिर्फ एक पतली सी चादर लेकर रात को इस ठण्ड में सोया करते हैं ,, दिन में जब जाकर देखा गया तो वो बिना कमीज़ के वहीँ पड़े हैं और किसी के पास एक कमीज़ है भी तो वो उसे 3 से 4 दिन में एक बार धोकर दोबारा वही पहन लेते हैं .. हमने सोचा जब हम बिलासपुर शहर में रक्तदान जागुकता ला सकते हैं .. जिसकी वजह से आज हज़ारो नए रक्तदाता आगे आकर रक्तदान करने लगे हैं .. तो क्यूँ ना इन लोगों के लिए भी कुछ ऐसा किया जाए जिस से इन्हें राहत मिल सके … हमने 1 नवम्बर से शुरू की थी ये वस्त्रदान अभियान की मुहीम.. जिसे सोशल मीडिया और हर तरफ से सहयोग और प्रोत्साहन मिलने लगा
    हम हर साल इसी तरह से कभी कम्बल तो कभी कपड़े बाटने टीम के सदस्यों के साथ निकला करते हैं … ख़ास कर इस कंपकंपा देने वाली ठण्ड में इन गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को हमारी ज़रूरत है .. मैं शहर के सभी वर्गों से विनम्र अपील करता हूँ यथासंभव आप अपने त्यौहार , जन्मदिन, खुशियाँ इन लोगो के बीच जाकर मनाने का प्रयास किया करें ताकि इनकी दुवाओं से आपके त्यौहार , जन्मदिन या खुशियाँ बढती रहें !
    जज़्बा की टीम पिछले १२ सालों से लगातार रक्तदान जागरूकता पर काम कर रही है जिसके फलस्वरूप बिलासपुर शहर और आसपास के क्षेत्रो से हज़ारो नए युवा आगे आकर अब रक्तदान करने लगे हैं .. संजय ने बताया की उनके द्वारा आयोजित होने वाले हर शिविर में लगभग 70% रक्तदाता नए आते हैं !
    इसके अलावा ज्ञात हो संस्था द्वारा थैलेसिमिया मेजर नामक भयानक बिमारी को लेकर भी जागरूकता का कार्य किया जा रहा है और साथ ही संस्था ने 20 थैलेसिमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज का खर्चा भी उठा रखा है !
    संस्था को वर्तमान में किसी तरह की कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हो पा रही है लेकिन उसके बावजूद संस्था के हौंसले और जज़्बा बरक़रार है !
    संस्था ने शहर के व्यापारी और समर्थ लोगों से उनसे जुड़ने और उनकी आर्थिक सहायता करने की अपील भी की है !
    इस कार्य में विशेष भूमिका निभाई यूथ संस्कार फाउंडेशन के सदस्यों ने जिनकी वजह से सारा कार्य अनुशासित तरीके से और सुन्दर तरीके ससे संभव हो पाया !
    वस्त्रदान अभियान में सहयोग करने वालों में विनय वर्मा, विजय वाधवानी, गिरीश लालचंदानी, श्रीमती किरण मोइत्रा, राहुल गुरनानी, अभय दुबे , मो. कलाम, मो. नियाज़, उत्तम साहू, मो. समीर, मनीष मेहरचंदानी, विक्रम प्रताप, सोमी अग्रवाल, सावित्री आडवानी, दीपक चंद्रा, ऋतिक सिंह, राजा पाण्डेय, अभिषेक पाण्डेय, निमेश बुन्गलिया, मो. अफताब, दानिश खान, दीपक अग्रवाल, पूजा प्रभुवानी, साक्षी आर्या, पूनम पंडा, देवयानी रॉय, दीपक जग्यासी, महेंद्र चतुर्थी, धनसाय जैसवाल, लीला वर्मा, नीरज साहू, राजवीर पटेल, रोमा साहू, शब्बीर कुरैशी, शुभम प्रभुवानी, लक्षमण प्रभुवानी, शामिल थे

https://youtu.be/qzAuCyIBL1Q

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