*🙏🙏🙏🙏नमस्कार मैं मुकेश तिवारी आज एक बार फिर से आप सभी के समक्ष एक दर्द भरी कहानी लेकर उपस्थित हूं*

*आप सभी से निवेदन है कि आप इस कहानी को पूरा पढ़ें कहानी नहीं बल्कि इस कहानी में साक्ष्य छुपा है*
यह कहानी है उस मां की जिसने अपने बच्चों को जन्म दिया, पूरा भरा परिवार है। पति, दो बेटा दो बहु,नाती पोते सब है । *यह कहानी है उस नालायक बेटे की जो जन्म तो मां के कोख से लिया लेकिन अपने आप को धरतीपुत्र बताता है*

*ये कहानी है उस पति की जब तक पत्नी की जरूरत थी तो पत्नी थी लेकिन अब तो बेटे बहू साथ में है*
*पत्नी को घर से निकाल दिया खबर के मुख्य तथ्य पर आते हैं हमें पूरा यह सब कुछ जानने के लिए पिछले हिस्से में जाना पड़ेगा*

*आइए हम कहानी को शुरू से जानने की कोशिश करते हैं की समस्याएं कैसी हुई …/*

*जब एक मां एक लड़की की शादी करती है तो लड़की अगर नाबालिक हो तो अपने ससुराल पहुंचती है*

*उसको इतना भी नहीं मालूम रहता घर में किस तरह से रहेंगे अपने आप फूलों से घर में पाली बड़ी लड़की की 12 साल की उम्र में शादी हो जाती है तो लड़की ससुराल पहुंच जाती है अपने ससुराल में पहुंचती है तो देखती है कि वहां पर उनका पति सास और ससुर सहित कई देवर का पूरा भरा परिवार है लेकिन जब बहू बनकर पहुंचती है तो उनके घर वाले उनके साथ अन्याय करना शुरू कर देते हैं जो हमारे देश के हर तीसरे घर में हर महिला को झेलना पड़ता है गुजरना पड़ता है इसके बाद तंग होकर महिला अपने ससुराल के घर को छोड़ देती है और एक अपनी नई जगह पर देख कर अपने पति के साथ में अलग हो जाती है और अपनी एक नई गृहस्ती तैयार करती है यह सोचती है कि मेरा जीवन आराम से गुजर जाए और मुझे किसी चीज की तकलीफ नहीं होती है एक-एक छोटी छोटी सी वस्तु को जोड़कर एक बड़ा आलम तैयार हो गया।
आने वाले में धीरे-धीरे बच्चे जवान हो जाते हैं सही बच्चों का धीरे-धीरे शादी होता है उनके चारों बच्चों में चार लड़कियां होती हैं एवं दो बेटे होते हैं बता दें कि आज की दुनिया में बेटी और बेटों को भी लेकर बहुत अलग तरह से देखा जा रहा था ।
अभी सच्चाई एक बार फिर से सामने आ रही है *कहानी उन दिनों की है जब ये नालायक बेटे कुछ चीज लेने की जिद करते उनको बहुत आसानी से मिल जाया करती थी अगर बेटियां जिद करे तो उनकी बात को सुनकर अनसुना कर दिया जाता था, यह कह दिया जाता था ठीक है पहले बाबू को दे दो फिर तुम लोग ले लेना*

*क्योंकि जो ये बेटे घर के चिराग भी थे इसीलिए शायद इन बेटों के लिए बेटियों से ज्यादा महत्व दिया जाता था । आज अब ये बेटे घर के मालिक हैं ओर घर मे उन्ही लाडलो की चलती है। लेकिन मित्रों सबसे बुरी बात यह है कि जिन बेटों और बाबुओं के माता पिता ने बेटो से बेटियों के हाथ काटे थे और अपने बेटों के साथ अच्छा एवं निजी स्कूल शिक्षा दी , वही बेटियों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया दूसरे की किताबो से काम चलाया, बेटों को प्राइवेट स्कूल में शिक्षा दी और उनके साथ उनको डिग्री करवाया ताकि उनको अच्छी नौकरी मिल सके ।

वही किसी भी बेटी को 12वीं कक्षा पास नहीं कर पाये । उसके पहले ही शादी कर दी लेकिन बेटो को तो ग्रेजुएशन करवा दिया और यही सोच कर के बेटे मेरे भविष्य के साथ ही बनेंगे घर के चिराग बनेंगे यूं ही नहीं जब पिताजी रिटायर हुए तो पिताजी ने अपना पूरा कमाई का एटीएम बैंक अकाउंट तक भी अपने बेटे को दे दिया बेटे स्वयं मालिक बन गए और पिताजी जरूरत पड़ती है तो पिताजी को खुद एक रुपए नहीं मिलता है।

अगर मां पिता जी की बात करें स्थिति बहुत खराब हो गई है क्योंकि जिन बेटों के लिए इतना सब कुछ किया था वही बेटे आज अपने बीवी बच्चों के साथ ठंडी के दिनों में दिन में 9:00 बजे तक सोते हैं वही मां बिचारी इधर से उधर दो रोटी खाने के लिए भटकती है ।
मित्रों भाइयों माताओं बहनों हम आपसे हमेशा यही कहते हैं कि बेटों ओर बेटियों फर्क छोड़ दो ।

लेकिन बात यह है कि जिस बेटो को फूलों की तरह खिलाया पढ़ाया लिखाया उस पति का क्या जिस पत्नी को लेकर घर से अलग हुआ इसके साथ पूरी जिंदगी चल गई लेकिन आखिरी वक्त में जिंदगी के कुछ ही दिन बचे हुए हैं
आखिरी दौर में आखिर में इतनी क्या समस्या आ गई कि उस बूढ़ी मां को घर में रहने के लिए जगह नहीं दी जा रही है आखिर में क्या वजह है कि इस समस्या के कारण घर में ताला बंद कर दिया जा रहा है उसके साथ अत्याचार किया जा रहा है जबकि पति के अभी भी सरकारी पेंशन मिल रही है उसमें कोई अधिकार नहीं है क्या हमारे देश का यही सिस्टम है क्या आखिर हमारे देश की नारियां जगज्जननी कब तक परेशान होते रहेंगे क्या हमारे देश के प्रधानमंत्री यह नहीं समझते टीवी में ऐड दिखाने से कुछ नहीं होगा हर तीसरे घर की यही कहानी है आखिर में समस्या का निदान कब होगा क्या महिलाएं कभी सुरक्षित होंगी ।

मित्रों इस कहानी को आगे हम पार्ट 2 में फिर से आपके लिए लेकर आएंगे अभी के लिए बस इतना ही आपके अपने दोस्त मुकेश तिवारी को दीजिए आझा नमस्कार..

LEAVE A REPLY