उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ बीजेपी के कल शाम दो नेता बेहद फिल्मी अंदाज में भीड़ गए
मामला है संत कबीर नगर के जिलाधिकारी कार्यालय सभागार का
जहाँ निगरानी समिति की बैठक चल रही थी बैठक में आला अधिकारियों सहित प्रभारी मंत्री आशुतोष टण्डन

भी मौजूद थे साथ ही सांसद व विधायक भी मौजूद थे।
सबकुछ ठीक ठाक ही था कि मौक़े पर एक सड़क निर्माण को लेकर बातचीत में स्थानीय सांसद शरद त्रिपाठी

ने लोक निर्माण विभाग के जेई से सवाल किया कि हालहि में बनी एक सड़क के शिलापट्ट पर मेरा नाम क्यो नही था जेई और सांसद बात कर ही रहे थे कि  राकेश सिंह बघेल विधायक जी

ने सांसद से कहा कि मुझसे बात कीजिये इसपर सांसद बिफ़र पड़े और कहा कि आप कौन है विधायक जी भी पीछे नही हटे और तू ताड़क पर उतर
प्रभारी मंत्री और स्थानीय नेताओं में विवाद खत्म करने की कोशिस की इसी दौरान विधायक जी ने जूता की तरफ इशारा किया बस फिर क्या था शरद त्रिपाठी ने पलक झपकते बाएं हाथ से जूता उतार कर दांये हाथ मे लिया और 4 सेकंड के अंदर अनवरत गति से सात जूते विद्यायक जी को जड़ दिए इसपर विधायक और सांसद के बीच कालर पकड़ी पुकड़ा हुई और भोजपुरिया गालियों की अराझोर बौछार शुरू हो गयी।
मौके पर एक प्रसासनिक व्यक्ति ने मारपीट को रोकते हुए सांसद जी को हटाया
इधर विधायक समर्थक सांसद से बदला लेने के इरादे से हज़ारों की संख्या में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने लगे प्रसासन ने जिलाधिकारी कार्यालय के एक कमरे में सांसद को सुरक्षित रखा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज सुरू कर दी गयी जिसमें कई लोगो को चोट भी आई।
इधर जिले के तीनों विधायक धरने पर बैठ गए लाठीचार्ज के विरोध में धरना समाप्त हुआ और सांसद को रात 8 बजे उनके निवास गोरखपुर पहुंचा दिया गया

मामले में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी
रातो रात प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय

ने मामले की निंदा करते हुए दोनों को लखनऊ तलब करने की बात कही
इधर विपक्षी दल इसे भाजपा का चरित्र बता रहे है।

एनआईए से बातचीत के दौरान सांसद ने सेल्फ डिफेंस में जूता लात करने की बात कही और कहा कि मेरा चरित्र ऐसा नही है

जो भी हुआ वो नही होना चाहिए सीधे सीधे माफ़ी मांगने से भी बचते रहे सांसद

उधर विधायक ने कहा कि मुझे कुछ नही चाहिए बस समर्थकों से माफ़ी मांग लेनी चाहिए सांसद को मैं इस मामले को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाऊंगा

कौन है शरद त्रिपाठी
शरद त्रिपाठी का कोई आपराधिक इतिहास नही है शरद त्रिपाठी भी विधायक की तरह पहली बार चुन कर के आये इससे पहले शरद 2009 में लोकसभा चुनाव हार गए थे
शरद त्रिपाठी को बेहतरीन संसद सदस्य का ख़िताब भी मिल चूका है
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता रमापति राम त्रिपाठी

के सुपुत्र है।

कुलमिलाकर लोकतंत्र में ऐसी अभद्रता का कही कोई स्थान नही है लेकिन आवेश में नेता हमेशा मुँह तो ताबड़तोड़ चला देते है लेकिन जूता चलाने का यह शायद पहला ही वाक्या होगा।
मामले में फ़िलहाल कुछ होने की सम्भावना तो नही है लेकिन तमाम लोग सोशल मीडिया पर इसे जातिवाद का रंग देने में लगे हैं

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