Sunami News Tv_1967 से बैलाडीला में हो रही है बैसाखी की लंगर…दंतेवाड़ा/किरंदुल: गुरुद्वारा श्री श्री गुरु सिंह सभा,बैलाडीला के तत्वाधान से 14 अप्रैल पर गुरुद्वारे में बैसाखी पर्व मनाया गया जिसमें सिखों द्वारा साप्ताहिक पाठ किया गया और सातवें दिन बैसाखी पर अरदास के बाद लोगों ने एक दूसरे को बधाइयाँ दी व कड़ा प्रसाद वार्ता कर सब लोगों का मु मीठा कराया।इसी कड़ी में पधारे अतिथिगण एन एम डी सी महा प्रबंधक ऐ के प्रजापति उप महा प्रबंधक(कार्मिक) एस.चटर्जी उप महाप्रबंधक(सिविल) लखबीर सिंह जी का ज्ञानी श्री मंगल सिंह द्वारा स्वागत किया गया तद्पश्चात समाज द्वारा नव-मनोनीत समिति के पधिकारीगण की जानकारी दी गई जिसमें सचिव सरदार परमजीत सिंह,अध्यक्ष सरदार सुरेंद्र सिंह,उपाध्यक्ष सरदार गुरमीत सिंह,संयुक्त सचिव सरदार गजेंद्र अरोरा एवं केशियर सरदार हुस्सैनलाल संधू सभी है।सरदार राजेश संधू जी ने गुरुद्वारे को बैलाडीला की प्रथम धर्म स्थल में से एक बताया जो कि सन्न 1967 से स्थापित है और तब से श्रद्धालुओं द्वारा गुरु सेवा,पाठ व आज की तरह सिखों के हर प्रमुख त्यौहारों पर सर्वजीनिक लंगर का आयोजन होता आया है जिसमें लोग भारी मात्रा उपस्थित होकर आनंद लेते रहे है। ज्ञानी जी ने

बैसाखी को वैशाख से बना है बताया एवं पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियाँ मनाते हैं। इसीलिए बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है। इसी दिन, 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते आ रहे है।

 

News post By_Mukesh Tiwari State Editor MpCg_09174310780

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