पत्रकारों / साहित्यकारों / कवियों एवं संगीतकारों का भी दर्द सुनिए सरकार

चंदन कुमार, उप संपादक, सुनामी टाइम्स

पटना : नेशनल प्रेस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष का कमान संभालने के दुसरे दिन ही यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश कुमार पांडेय देश के माननीय प्रधानमंत्रीजी श्री नरेंद्र मोदी एवं बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार जी को पत्र लिखकर बिहार के सभी पत्रकारों / साहित्यकारों / कवियों एवं संगीतकारों के लिए कई मांगे रखी है . ईमेल के माध्यम से मुख्मंत्री एवं प्रधानमंत्री जी को भेजे गए पत्र में नेशनल प्रेस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश कुमार पांडेय ने लिखा है की आज पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है . इस संकट की घड़ी में पत्रकार / / साहित्यकार / कवि एवं संगीतकार अपने क्षेत्र में लगे हुए है . अपनी जान की प्रवाह किए बिना ऐ सभी लोग समाज को जागरूक कर रहे है . पत्रकार दिन रात एक कर खबरों को सबसे पहले लोगो के सामने रखते है . आज भी पत्रकारों को वेतन नही मिलता है . उनको सिर्फ परिश्रमिक मिलता है . ये लोग विज्ञापन से मिले कमिशन से अपनी जीविका चलाते है . लांकडाउन में इनलोगो को विज्ञापन भी अब नही मिल रहा है जिसके चलते इन पत्रकारों के बिच भुखमरी एवं आर्थिक तंगी की स्थिति पैदा हो चुकी है . वही कलाकार कवि लोग भी अपनी कला के माध्यम से लगतार समाज को जागरूक कर रहे है लेकिन इन लोगो को भी सरकार द्वारा उचित सम्मान नही दिया जा रहा इसलिए माननीय मुख्यमंत्री जी बिहार एवं माननीय प्रधानमंत्री जी भारत सरकार इस समाज के लोगो के दर्द को समझते हुए चिन्हित कर इन्हें आर्थिक मदत के साथ राशन मुहैया कराए .
इसके साथ है पत्रकारों के हित में जो मुख्य मांगे है उन्हें सरकार जल्द से जल्द पूरा करे जिसमे मुख्य रूप से
– “पत्रकार सुरक्षा कानून” अविलम्ब लागू हो।

2- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर कवरेज के दौरान हमले को विषेश कानून के तहत दर्ज किया जाए।

3- पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज करने से रोकने को सरकारी काम में बाधा की तरह देखा जाए।

4- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामलों की पहले स्पेशल सेल के तहत जांच की जाए, मामले की पुष्टि होने पर ही केस दर्ज किया जाए।

5- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामले की जांच के लिये कम से कम पीसीएस या आईपीएस अधिकारी द्वारा जांच हो।

6- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी पर झूठा मामला दर्ज किया जाता है और उसकी पुष्टि होती है तो झूठा मुकदमा करने वालों के खिलाफ आजीवन कारावास और अधिकतम जुर्माने का प्रावधान हो।

7- पत्रकार/मीडियाकर्मी की हत्या को रेयरेस्ट क्राइम के अंतर्गत रखा जाए।

8- पत्रकार/मीडियाकर्मी की कवरेज के दौरान दुर्घटना या मृत्यू होने पर नि:शुल्क बीमा प्रदान किया जाए।

9- कवरेज के दौरान घायल हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी का इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

10- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी के परिजनो पर रंजिशन हमला किया जाता है तो उनका इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

11- कवरेज के दौरान अथवा किसी मिशन पर काम करते हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए।

12- पत्रकार/मीडियाकर्मी को आत्म सुरक्षा हेतु लाइसेंस इश्यू किया जाए।

13- सभी पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज के लिये राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए।

14- प्रशासनिक व विभागीय बैठकों में पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य हो।

15- पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज हेतु आवागमन के लिये आधे किराये का प्रावधान हो, तथा रेलवे में यात्रा के लिये शीघ्र आरक्षण का प्रावधान हो।

16- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये टोल टैक्स में छूट प्रदान की जाए।

17- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी को धमकियां मिले तो उसकी सुनवाई शीघ्र हो तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

सामाजिक सुरक्षा हेतु संस्तुतियां

1- राज्य एवं केन्द्र के स्तर पर पत्रकार आर्थिक सुरक्षा निधि योजना का संचालन हो।

2- 10,000 का नि:शुल्क बीमा सुनिश्चित हो।

3- गम्भीर बीमारी की स्थिति में अच्छे अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था हो।

4- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना हो।

5- जिस तरह किसान ऋण योजना है उसी प्रकार पत्रकार/मीडियाकर्मियो हेतु ऋण योजना बैंको द्वारा संचालित हो।

6- पत्रकार/मीडियाकर्मियों हेतु कार्यालय योजना हो जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर कार्यालय उपलब्ध हों।

7- प्रिंटिंग प्रेस लगाने हेतु विषेश पैकेज व्यवस्था हो तथा प्रिंटिंग प्रेस पर आयत शुल्क में रियायत हो।

8- पत्रकार/मीडियाकर्मियों के बच्चों के लिये अच्छे शिक्षण संस्थानों में कोटा हो अथवा उनकी फीस में रियायत हो।

9- पत्रकार/मीडियाकर्मी हेतु आवास योजना हो, जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर आवास उपलब्ध हों।

10- लाँकडाउन के दौरान किसानो एवं मजदूरों की तरह पत्रकारों को भी फ्री राशन एवं आर्थिक मदद दिया जाय I

जब तक लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकार/मीडियाकर्मी की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक किस तरह एक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना की जा सकती है और किस तरह भारत विश्व में निष्पक्ष भयहीन और स्वतंत्र मीडिया होने का दम्भ भर सकता है ? जल्द से जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए I
अतः माननीय प्रधानमंत्रीजी भारत सरकार एवं माननीय मुख्यमंत्रीजी बिहार सरकार से विनम्र आग्रह है कि पत्रकारों की जरूरी सुविधा को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त सभी मांगो को अतिशीघ्र पुरे बिहार में लागु कराया जाय I इसके लिए हम सभी पत्रकार आपके आभारी रहेगे I

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