विजय शुकुळा,

बिहार में शराबबंदी को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं वह वाकई हैरान करने वाला है, सत्र 2020 का महीना अंतिम पड़ाव पर चल रहा है, इस बीच अवैध शराब जब्ती का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है ,इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक 26 लाख 91 हजार 731 लीटर शराब बरामद की गई है,यह आंकड़ा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, बिहार पुलिस की मद्य निषेध टीम और सभी जिलों की पुलिस के तरफ से किए गए कार्रवाई का है, 39 लाख 367 रुपया कैश, 6 हजार 316 टू व्हीलर्स, 3 हजार 203 थ्री व्हीलर्स को जब्त किया गया है। साथ ही इस गोरखधंधे में शामिल 48 हजार 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया है,इसमें अकेले मद्य निषेध की टीम ने इस साल 410 छापेमारी की, 260 FIR दर्ज किए। 271 गिरफ्तारियां की, 3 लाख 37 हजार 444 लीटर विदेशी, 24 हजार स्प्रीट और 4 हजार 336 लीटर देशी शराब बरामद किया, 65 ट्रक और 84 दूसरी गाड़यो को जब्त किया। 21 लाख 86 हजार 285 रुपया और 3 हथियार, 15 गोली, 2 मैगजीन, 26.74 किलो गांजा भी बरामद किया।

शराबबंदी कानून लागू होने के बाद हर साल मुख्यालय में बैठे सीनियर अधिकारियों से लेकर थानों में तैनात पुलिस पदाधिकारी, सिपाही व चौकीदार तक को शराब का सेवन नहीं करने और इसके धंधेबाजों से कनेक्शन नहीं रखने की शपथ दिलाई जाती है, आज भी बिहार पुलिस के मुखिया डीजीपी संजीव कुमार सिंघल ने अपने अधिकारियों से लेकर निचले स्तर के कर्मियों को वही संकल्प फिर से दोहराया, हर साल शपथ लेने के बाद भी पुलिस वालों का ही कनेक्शन शराब माफियों के साथ जुड़ा मिलता है, बिहार को शराबमुक्त बनाने की जिम्मेवारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन्हीं के कंधों पर सौंपी थी, लेकिन वक्त-वक्त पर कई ऐसे कारनामे सामने आए, जिससे पुलिस डिपार्टमेंट को ही शर्मिंदगी उठानी पड़ी, सरकारी आंकड़े भी यही बताते हैं।

13 इंस्पेक्टरों को नहीं मिलेगी थानेदारी

इस साल में अब तक 13 पुलिस इंस्पेक्टर ऐसे मिले, जिनके उपर शराब माफियाओं के साथ जुडे़ होने का गंभीर आरोप लगा, जो थानेदारी तो कर रहे थे, लेकिन अपने इलाके में अवैध रूप से शराब की बिक्री को रोक नहीं पाए, ऐसे थानेदारों के इलाकों में पटना से जाकर मुख्यालय की टीम ने कार्रवाई की, इस तरह के मामलों में पहचान किए गए सभी थानेदारों पर मुख्यालय स्तर से कार्रवाई हुई। इन सभी को अब थानेदार नहीं बनाया जाएगा, थानेदारी के पद के लिए 13 इंस्पेक्टर को बैन कर दिया गया है,

पुलिस की नौकरी से 95 बर्खास्त

बिहार में अवैध रूप से बिकने वाले शराब का धंधा ऐसे ही नहीं फल-फुल रहा है, इसमें पुलिस वालों का बड़ा हाथ है।इस साल मुख्यालय ने अपनी पड़ताल में 95 पुलिस वालों की पहचान की,सभी के खिलाफ डिपार्टमेंटल इंक्वारी चली, आरोप साबित होने के बाद उन्हें जो सजा मिली, उसका उन्हें अंदाजा भी नहीं रहा होगा। इन सभी को पुलिस की नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया गया।

80 पर FIR और 107 पर चल रही है प्रोसिडिंग

शराब माफियाओं से दोस्ती रखने वाले सब इंस्पेक्टर, एएसआई, हवलदार, सिपाही, सैप जवान, होमगार्ड और चौकिदार समेत कुल 80 लोगों पर इस साल अलग-अलग थानों में FIR दर्ज कराई गई है, इनके अलावे 107 पुलिस पदाधिकारी और जवान ऐसे हैं, जिनके खिलाफ व डिपार्टमेंटल इंक्वायरी और प्रोसिडिंग चल रही है।

सरकार को होती थी 5 हजार करोड़ की आमदनी

  1. पुराने कारोबारी की मानें तो पूर्ण
  1. शराबबंदी
  1. से पहले बिहार सरकार को हर साल शराब के कारोबार से 5 हजार करोड़ की आमदनी होती थी, लेकिन बंदी के बाद से अवैध शराब का कारोबार बढ़ गया और सरकार का राजस्व शून्य हो गया, बिना इंपोट, एक्सपोर्ट और टैक्स का लॉस है, सरकार को अगर पूरे तरीके से शराब को बंद कराना है तो बॉर्डर बंद करवाना होगा,तभी अवैध धंधा रूकेगा,

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