बूटा सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। देश के केंद्रीय गृह मंत्री, बिहार के राज्यपाल और 2007 से 2010 तक अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष रहे। उनका जन्म 21 मार्च 1934 को पंजाब के जालंधर में हुआ।कांग्रेस पार्टी के वफादार रहे, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री, राजस्थान से 4 बार सांसद रहे सरदार बूटा सिंह का शनिवार सुबह दिल्ली के एम्स अस्पताल में लंबी बीमारी के चलते 86 साल की उम्र में निधन हो गया। कांग्रेस नेता पिछले साल अक्टूबर से कोमा में थे, जब उन्हें ब्रेन हेमरेज होने के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती किया गया था। वहीं दलितों के मसीहा रहे और उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी की सरकार में अहम भूमिका में रहे और कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

कहते हैं कि वो नेहरू-गांधी परिवार के विश्वासपात्र भी रहे। उन्होंने गृह मंत्री, कृषि मंत्री, बिहार राज्यपाल, राजस्थान सांसद के रुप में काम किया। पहले बार उन्हें साल 1986 में राजीव गांधी की सरकार में एक बड़ा पद दिया गया। 1986 और 1989 के बीच देश के गृह मंत्री रहे। उसके बाद 1984 से 1986 तक कृषि मंत्री का पद संभाला। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष की भी भूमिका निभाई थी। उन्हें कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ दलित नेता भी कहा जाता था। कहते हैं कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव के रूप में 1980 में फिर से वापसी के लिए कड़ी मेहनत की थी।

आखिरकार, 71 साल के बूटा सिंह ने बिहार में राज्यपाल के रूप में काम किया तो एक शानदार सफर भी रहा। पंजाब में एस.एस. बरनाला की सरकार (1987), तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक सरकार (1988) और एस.आर. कर्नाटक में बोम्मई सरकार (1989) बनाने में भूमिका निभाई थी। वो राजीव गांधी की सरकार में दूसरे नंबर के नेता गिने जाते थे। कहते हैं कि बूटा सिंह ने बिहार विधानसभा को भंग करने में एक पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया। केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के अनुसार, विधानसभा को भंग करने के लिए अप्रासंगिक कारण बिहार के राज्यपाल ने दो रिपोर्ट थी, दोनों में हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगाए गए थे।

इंदिरा गांधी की सरकार में उन्होंने ऑपेरशन ब्लू स्टार में भी अहम भूमिका लगाई थी। ऑपेरशन ब्लू स्टार और 84 के दगों के बाद पंजाब से बूटा सिंह को राजस्थान ट्रांस्फर कर दिया था। राजस्थान में जालौर की सुरक्षित सीट से उन्हें खड़ा किया गया और आसानी से चुनाव जीत गए। इसके बाद वो बड़े कद के नेता बन गए और कांग्रेस में उनकी आवाज बुलंद हो चली।

महत्वपूर्ण पद

1. 1986 से 1989 तक केंद्रीय गृह मंत्री

2. 984 से 1986 तक कृषि मंत्री

3. 2004 से 2006 तक बिहार के राज्यपाल

4. 2007 से 2010 तक मनमोहनसरकार के दौरान राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष

सरदार बूटा सिंह का जीवन परिचय

बूटा सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। देश के केंद्रीय गृह मंत्री, बिहार के राज्यपाल और 2007 से 2010 तक अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष रहे। उनका जन्म 21 मार्च 1934 को पंजाब के जालंधर में हुआ और उनका निधन 2 जनवरी 2021 को हुआ। वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वफादार नेता रहे। दिल्ली से कांग्रेस के नेता और उनके बेटे अरविंदर सिंह लवली हैं। उन्होंने गुरु नानक कॉलेज ऑफ आर्ट्स साइंस एंड कॉमर्स, एमवे, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी से अपनी पढ़ाई की। भारत में दलित और दलित जागृति की किताब भी उन्होंने लिखी थी।

दोबारा कांग्रेस में हुए शामिल

बूटा सिंह ने अक्टूबर 2015 में कांग्रेस में दोबारा शामिल हो गए थे। उन्होंने 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में राजस्थान के जालोर से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उन्होंने सफाई मजदूरों के कल्याण के लिए हमेशा काम किया और मजदूर कांग्रेस का भी नेतृत्व किया।

 

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