अतीश दीप॔कर,

हे प्रभु! हमलोग मरने के बाद अपने परिवार को कष्ट नहीं देना चाहते, इसलिए अभी हमारे बीच मौत का वारंट लेकर मत आइएगा।भागलपुर में दाह संस्कार के नाम पर लूट मची है। एक लाश के अंतिम संस्कार में 30,920 रुपए का खर्च आता है। ऊपर से डोम राजा की मनमानी अलग। श्मशान घाट पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं। ऐसे में अगर मर गए तो परिवार के लोग परेशान ही होंगे। इसलिए हमारी विनती स्वीकार करें, फिलहाल मौत के वारंट को टाल दें। यह है खत का मजमून, जो भागलपुर के लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से यमराज को लिखा है।इसकी प्रतिलिपि धरती पर भागलपुर के DM, SP, नगर आयुक्त और SDO को भी प्रेषित की गई है।

आखिर क्यों आई यमराज को चिट्‌ठी लिखने की नौबत

भागलपुर के बरारी घाट पर अराजक स्थिति से त्रस्त लोगों को जब कोई उपाय नहीं सूझा तो यमराज को ही चिट्‌ठी लिख दी। परेशानी की वजह यह है कि अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्तियों द्वारा मृत परिवार के परिजनों से मनमाना शुल्क वसूला जाता है। नहीं देने पर परिजनों के साथ बदसलूकी की जाती है। परिजनों से उसकी आर्थिक स्थिति के अनुसार राशि निर्धारित कर दी जाती है। यह राशि 5100 से लेकर 51 हजार तक हो सकती है। घास काटने और पंचकाठी के समय भी डोम राजा द्वारा काफी मोलभाव और बहस के बाद मुखाग्नि दी जाती है।

सरकार देती है 3 हजार, खर्च हो जाता है 30,920 कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना के तहत किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु पर बिहार सरकार द्वारा मृतक की अंत्येष्टि के लिए 3 हजार रुपए की सहायता दी जाती है जबकि घाट की व्यवस्था देख रहे लोग एक आम आदमी से इसका दस गुना ज्यादा पैसा खर्च करवा देते हैं। कर्ज लेकर अंतिम संस्कार कराने की नौबत आ जाती है।

 

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