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चंद्रयान-2 आज चांद की दूसरी कक्षा में जाएगा, 7 दिन इसी में लगाएगा चक्कर

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बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज चंद्रयान-2 को चांद की दूसरी कक्षा में प्रवेश कराएगा। इसरो वैज्ञानिक दोपहर 12.30 से 1.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा LBN#2 में डालेंगे। चंद्रयान-2 चांद के चारों तरफ 121 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 4303 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली दूसरी अंडाकार कक्षा में अगले सात दिनों तक घूमता रहेगा, इसके बाद 28 अगस्त को चंद्रयान-2 को चांद की तीसरी कक्षा में डाला जाएगा। बता दें कि चांद के अनदेखे दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में एक रोवर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने पर केंद्रित भारत के दूसरे चंद्र मिशन ने मंगलवार को उस समय एक बड़ी उपलब्धि हासिल की जब अंतरिक्ष यान चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया।

मंगलवार सुबह 9:02 पर चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। यह प्रक्रिया लगभग 30 मिनट तक चली। यान को चांद की कक्षा में पहुंचाने की प्रक्रिया के दौरान इसकी गति 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड से घटकर 2.1 किलोमीटर प्रति सेकंड हो गई। चंद्रयान-2 को गत 22 जुलाई को ‘बाहुबली’ रॉकेट जीएसएलवी मार्क ।।।-एम 1 के जरिए प्रक्षेपित किया गया था। गत 14 अगस्त को इसने धरती की कक्षा से बाहर निकलकर चंद्र पथ पर चंद्रमा की ओर बढ़ना शुरू किया था। इसमें एक ऑर्बिटर, ‘विक्रम’ नाम का एक लैंडर और ‘प्रज्ञान’ नाम का एक रोवर है।

लैंडर 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा और यदि यह बेहद जटिल प्रक्रिया सफल होती है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथ देश बन जाएगा। मंगलवार की प्रक्रिया सफल होने के बाद इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि यान 140 किलोमीटर के निकटतम बिन्दु और 18,000 किलोमीटर के सुदूरतम बिन्दु के साथ कक्षा में चांद के चक्कर लगाएगा। उन्होंने कहा कि 100 किलोमीटर X 100 किलोमीटर का निकटतम और सुदूरतम बिन्दु हासिल करने के लिए एक सितंबर को चार और प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘7 सितंबर को रात एक बजकर 15 मिनट पर लैंडर 22.8 डिग्री पूर्वी अंश के साथ चंद्र मध्य रेखा के 71 डिग्री स्थल पर उतरेगा।” उन्होंने कहा कि यह एक डराने वाला क्षण होगा। इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।

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