Local & National News in Hindi

जय और वीरू जैसी है मोदी-शाह की दोस्ती, जानिए कैसे हुई दोनों की पहली मुलाकात

0 68

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो चुका है। बीजेपी चीफ अमित शाह का कदम बढाते हुए उन्हें देश का नया गृह मंत्री बना दिया गया है। आज पूरे देश में भगवा झंडा लहरा रहा है जिसके पीछे सिर्फ और सिर्फ मोदी और शाह का यराना है। जब यूपी में अंतिम सांसों में सिसक रही भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की, लोगों ने इस जीत को मोदी-शाह सूनामी नाम दिया था।  आज हम आपको बताएंगे कि भारतीय राजनीति की सबसे सफल सियासी जोड़ी की नींव कब और कैसे पड़ी।

1982 में हुई शाह और मोदी की पहली मुलाकात

जानकारी मुताबिक 14 साल की उम्र से ही अमित शाह ने आरएसएस से जुड़कर उनकी शाखाओं में जाना शुरु कर दिया था। कहा जाता है कि उसी कड़ी में 1982 के आस-पास अहमदाबाद की नारणपुरा शाखा में शाह की मोदी से मुलाकात हुई थी। उस वक्‍त नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक थे और तब तक अपनी कुछ पैठ बना चुके थे। 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्‍यता ग्रहण करने के साथ ही अमित शाह ने सियासी दुनिया में कदम रखा। 1986 में उन्‍होंने बीजेपी ज्‍वाइन की। उसी दौरान नरेंद्र मोदी को भी संघ से बीजेपी में भेजा गया। इस तरह ये दोनों राजनेता लगभग एक ही दौर में बीजेपी में शामिल हुए थे। अमित शाह अपनी मां के बेहद करीब थे। उनकी मां कुसुम बा गांधीवादी थीं। उन्‍होंने ही बेटे को खादी पहनने को प्रेरित किया. 2010 में मां का निधन हुआ।

मुश्किलों का कर चुके हैं सामना
देश की राजनीति को मोदी और अमित शाह ने बेहद करीब से देखा है। अगर शाह के साथ मोदी ने गुजरात में हैट्रिक पूरी की थी तो वहीं साल 2002 के दंगो का गम भी झेला है। यही नहीं अमित शाह जब जेल में थे तो उनके परिवार को भी संभालने का काम मोदी ने ही किया है। यह आपस में दोनों की समझदारी और प्यार ही है जो मोदी ने सभी लोगों को दरकिनार करते हुए साल 2014 के आम चुनावों में यूपी का चुनाव प्रभारी अमित शाह को बनाया और उन्होंने मोदी को पार्टी की जीत का तोहफा दिया।

जब तल्ख हो गए मोदी और केशुभाई पटेल के रिश्ते
बताया जाता है कि 1996 में गुजरात बीजेपी के सीनियर नेता केशुभाई पटेल से मोदी के रिश्ते तल्ख हो गए, लेकिन, शाह ने मोदी से अपनी दोस्ती बरकरार रखी।  2001 में मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे तो शाह को मंत्री बनाया। तब उनकी उम्र सिर्फ 37 साल थी। इससे गुजरात की सियासत में बैठे लोगों को मोदी की नजर में शाह की अहमियत का अंदाजा हो गया।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Please Pay your remaining balance to remove this banner !
इस बैनर को हटाने के लिए कृपया अपनी शेष राशि का भुगतान करें !