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अब जमीन ली जाएगी वापस, पेट्रोलियम कंपनियों ने बिहार एथनाल यूनिट लगाए जाने की लिखी दुखांत पटकथा

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 पटना : पेट्रोलियम कंपनियों ने बिहार एथनाल यूनिट लगाए जाने की कहानी की दुखांत पटकथा लिख दी है। कुछ माह पहले जब पेट्रोलियम कंपनी ने अलग-अलग राज्यों से एथनाल क्रय किए जाने को ले एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किया था तब बिहार से 187.21 करोड़ लीटर वार्षिक एथनाल आपूर्ति का प्रस्ताव यहां की 29 कंपनियों ने दिया था। पूरे देश में बिहार इस हिसाब से सबसे ऊपर था जिसने इतनी बड़ी मात्रा में एथेनाल आपूर्ति के आवेदन दिए थे। अब जब ईओआइ के परिणाम जारी हुए हैैं तो स्थिति यह है कि बिहार को मात्र 18.48 करोड़ लीटर का कोटा आवंटित हुआ है। यह बिहार की तेल कंपनियों की कुल जरूरत 18.50 करोड़ लीटर से भी दो लाख लीटर कम है।

छह में केवल एक ही अभी उत्पादन में

जिन छह कंपनियों को ईओआइ के माध्यम से पेट्रोलियम कंपनी ने एथनाल आपूर्ति के लिए तय किया है उनमें अभी केवल एक कंपनी ही उत्पादन में हैै। केवल बिहार डिस्टलरीज एंड बाटलर्स प्राइवेट लिमिटेड ही अभी काम कर रही है। इसके अतिरिक्त उत्तर बिहार के एक सांसद से जुड़ी कंपनी भारत ऊर्जा डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड को अनुमति मिली है। एक कंपनी वैशाली की है मुजफ्फरपुर बायो फ्यूएल्स प्राइवेट लिमिटेड। वहीं एक कंपनी पटेल एग्री इंडस्ट्रीज की तीन यूनिट को एथनाल आपूर्ति का जिम्मा मिल गया है। यह कंपनी नालंदा में अपनी यूनिट लगाएगी।

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जहां कच्चे माल की प्रचुरता वहां एक को अनुमति नहीं

पेट्रोलियम कंपनी द्वारा जिन छह कंपनियों के नाम तय किए गए हैैं उनमें उन कंपनियों के नाम नहीं जो उन इलाकों में स्थित हैैं जहां एथनाल बनाए जाने को ले कच्चे माल यानी मक्के की प्रचुरता है। इओआइ के तहत उन्हीं कंपनियों से एथनाल का क्रय करना है जो अनाज से एथनाल का निर्माण करती हैं।

एथेनाल यूनिट के लिए दी गई थी जमीन, अब वापस होगी

उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एथनाल यूनिट लगाए जाने को ले एक दर्जन कंपनियों को जमीन उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने इसके लिए राशि भी जमा की थी। जिन छह कंपनियों को ईओआइ में अनुमति मिली है उनमें केवल दो ने बियाडा से जमीन ली है। अब उन कंपनियों को जमीन वापस करना होगा, जिन्होंने एथनाल यूनिट के लिए जमीन ली है। वैसे इंतजार यह भी हो रहा है कि पेट्रोलियम कंपनी कोटा बढ़ा सकती है।

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