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खगड़िया में गोबर से गमले, दीपक और जलावन का किया जा रहा निर्माण, मुन्नू देवी के प्रयासों ने लगाए चार चांद

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खगड़िया: कोरोना काल में उपजे आर्थिक संकट से जब खगड़िया गौशाला की स्थिति चरमरा गई, तो मन्नू देवी की समझ-बूझ और प्रयास ने इसकी सूरत ही बदल डाली। खगड़िया गौशाला संचालन समिति ने मन्नू देवी के प्रयासों को जमकर सराहा है। यह मन्नू देवी के प्रयासों का ही फल है कि अब खगड़िया गौशाला गोबर से गमला बना रही है। भविष्य में गोबर से जलावन भी तैयार किए जाएंगे। गोबर के दीप बनाने की भी योजना है। इससे गौशाला की आर्थिकी सुदृढ़ होगी।

फिलहाल पांच सौ गमले तैयार किए गए हैं। तीन सौ बिक गए। दो सौ बचे हैं। प्रति गमला 20 रुपये की दर से बिके। जबकि सिमेंट-मिट्टी के गमले 50 से 400 रुपये तक में बाजार में मिलते हैं। गौशाला मेला बाद फिर से गमले बनाने का कार्य शुरू हो जाएगा। गाय के गोबर से जलावन तैयार करने वाली मशीन की लागत एक लाख 25 हजार रुपये हैं। गमला निर्माण के लिए 53 हजार के मशीन लगाए गए हैं।

ऐसे शुरू हुई मुहिम

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जब गौशाला संचालन समिति के सदस्य अनिरुद्ध जालान की धर्मपत्नी मन्नू देवी को पता चला कि यहां की कोरोना काल में आर्थिक स्थिति डंवाडोल है, तो उन्होंने डेढ़ लाख की ई-रिक्शा गौशाला को दान दिया। इसके बाद पुष्पा देवी और निर्मल तुल्सयान ने भी एक-एक ई-रिक्शा दान में दिया। इससे प्रतिदिन गायों के लिए शहर में घूम-घूमकर भोजन एकत्रित किए जाते हैं। प्रत्येक दिन 17 क्व भोजन एकत्रित किया जाता है। एक माह में लगभग 50 टन के आसपास लोगों की ओर से दान किए गए भोजन गौशाला को प्राप्त होता है।

दानवीर मन्नू देवी के कदम रुके नहीं हैं, जारी है गौशाला की आर्थिकी बदलने का प्रयास

गौशाला को आर्थिक संकट से उबारने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मन्नू देवी ने ई-रिक्शा के बाद गायों के गोबर से निर्मित गमला व काष्ठ (गौबर से जलावन तैयार करने) निर्माण के लिए लगभग पौने दो लाख की मशीन गौशाला संचालन समिति को दान किया। गौबर से गमला का निर्माण शुरू है। जल्द ही जलावन बनाने का काम शुरू होगा। प्रतिदिन गाय के गोबर से दो टन जलावन तैयार किए जाएंगे।

‘गाय के प्रति आस्था हमें उनकी सेवा में खींच लाया। मैं जहां- जहां जाती हूं, लोगों से अपील करती रहती हूं कि वे गाय की सेवा करें। उनके लिए कुछ दान करें। जिससे गौशाला में पल रही गायों की भलाई हो सके।’-मन्नू देवी, सामाजिक कार्यकर्ता

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