Breaking
महू-नसीराबाद हाइवे पर जानलेवा गड्डे, ठेकेदार बोला- भूमिपूजन के बाद ही काम शुरू करेंगे टेस्ट सीरीज में मोहम्मद शमी के स्थान पर इन खिलाड़ियों को मिल सकता है मौका गुजरात की ऐतिहासिक जीत पीएम मोदी की लोकप्रियता के कारण : केंद्रीय रक्षा मंत्री  भोपाल में 2500 स्वयंसेवक एक साथ शारीरिक प्रदर्शन करेंगे सीएम योगी देंगे 387.59 करोड़ की सौगात श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर भंडारा आयोजित   निराशा भरा रहा है टीम इंडिया का साल 2022 बैंक ऑफ महाराष्ट्र में निकली बंपर वैकेंसी, 45 साल तक की उम्मीदवार कर सकेंगे आवेदन जहां पिता की हुई नियुक्ति, उसी यूनिट में तैनात हुए थे बिपिन रावत, जानें उनके शौर्य की गाथा अब आंगनबाड़ी में मिलेगा अक्षरज्ञान

जब गणेश जी पिता महादेव का अति सुंदर रूप देख रह गए दंग

Whats App

एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा-पिताजी आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते। मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में! अत:पिताजी, आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें। भगवान शिवजी मुस्कुराये और गणेशजी की बात मान ली।
कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी। बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी। सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गये। वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी उसके सामने फीका पड़ जाये।
भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी भी प्रकट नहीं किया था। शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप करोड़ों कामदेव को भी मलिन कर रहा था।
गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले-मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए। भगवान शिव मुस्कुराये और पूछा-क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों कही?
गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा-क्षमा करें पिताश्री, मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता। यह सुनकर शिवजी हँसे और अपने पुराने स्वरूप में लौट आये।
पौराणिक ऋषि इस प्रसंग का सार स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि आज भी ऐसा ही होता है। पिता रुद्र रूप में रहता है क्योंकि उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियों, परिवार के रक्षण और उनके मान सम्मान की जिम्मेदारी होती है तो थोड़ा कठोर बनना पड़ता है।
और माँ सौम्य, प्यार, लाड़, स्नेह देकर उस कठोरता का बैलेंस बनाती है। इसलिए सुंदर होता है माँ का स्वरूप।
पिता के ऊपर से भी यदि जिम्मेदारियों का बोझ हट जाए तो वो भी बहुत सुंदर दिखता है।

महू-नसीराबाद हाइवे पर जानलेवा गड्डे, ठेकेदार बोला- भूमिपूजन के बाद ही काम शुरू करेंगे     |     टेस्ट सीरीज में मोहम्मद शमी के स्थान पर इन खिलाड़ियों को मिल सकता है मौका     |     गुजरात की ऐतिहासिक जीत पीएम मोदी की लोकप्रियता के कारण : केंद्रीय रक्षा मंत्री      |     भोपाल में 2500 स्वयंसेवक एक साथ शारीरिक प्रदर्शन करेंगे     |     सीएम योगी देंगे 387.59 करोड़ की सौगात     |     श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर भंडारा आयोजित       |     निराशा भरा रहा है टीम इंडिया का साल 2022     |     बैंक ऑफ महाराष्ट्र में निकली बंपर वैकेंसी, 45 साल तक की उम्मीदवार कर सकेंगे आवेदन     |     जहां पिता की हुई नियुक्ति, उसी यूनिट में तैनात हुए थे बिपिन रावत, जानें उनके शौर्य की गाथा     |     अब आंगनबाड़ी में मिलेगा अक्षरज्ञान     |    

पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9431277374