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लोहड़ी पर बची रेवड़ियों से बनाएं फ्यूजन मिठाई, बच्चे भी शौक से खाएंगे

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लोहड़ी का त्योहार बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए खास होता है. इस दिन घर-घर में रेवड़ियां, गजक और मूंगफली खूब खाई जाती हैं. लेकिन त्योहार के बाद अक्सर रेवड़ियां बच जाती हैं, जिन्हें कोई खाना ही नहीं चाहता है क्योंकि वह कड़ी हो जाती है. ऐसे में अगर आप इन बची हुई रेवड़ियों को एक नई और मजेदार मिठाई में बदल दें, तो न सिर्फ बच्चे शौक से खाएंगे बल्कि आप इसे एक हेल्दी और क्रिएटिव ट्विस्ट के साथ सर्व कर पाएंगी.

आज इस आर्टिकल में आपको लोहड़ी की बची हुई रेवड़ियों से एक क्रिएटिव और स्वादिष्ट फ्यूजन मिठाई बनाने की रेसिपी बताने जा रहे हैं, जिसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता है और स्वाद में तो इसका कोई जवाब ही नहीं है.

रेवड़ी की फ्यूजन मिठाई की सामग्री

बची हुई रेवड़ियां

खोपरा (नारियल) 2 बड़े चम्मच

कटी हुई ड्राई फ्रूट्स 2 बड़े चम्मच

मक्खन – 1 छोटा चम्मच

हनी या क्रीम – 1 बड़ा चम्मच

थोड़ी कद्दूकस की हुई चॉकलेट

फ्यूजन मिठाई बनाने की विधि

सबसे पहले बची हुई रेवड़ियों को हल्का सा तोड़ लें या मिक्सर में थोड़ा दरदरा पीस लें. ध्यान रहे, रेवड़ी पूरी तरह पाउडर न हो, थोड़ी कुरकुराहट बनी रहे. अब एक पैन में मक्खन गर्म करें और उसमें खोपरा डालकर हल्का भून लें. अब इसमें पीसी हुई रेवड़ी डालें और धीमी आंच पर 2-3 मिनट हल्का सा भून लें. इससे रेवड़ी का स्वाद और भी बढ़ जाता है. इसके बाद इसमें ड्राई फ्रूट्स और हनी या क्रीम मिलाएं. अगर बच्चे चॉकलेट पसंद करते हैं, तो थोड़ा कद्दूकस किया हुआ चॉकलेट भी मिला सकते हैं. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें.

सर्विंग और प्रेजेंटेशन का तरीका

मिश्रण तैयार होने के बाद इसे छोटे-छोटे कटोरे या चम्मच में डालें. आप चाहें तो इसे हल्का ठंडा करके रोल्स या कटलेट जैसी शेप में भी बना सकते हैं. ऊपर से थोड़े और ड्राई फ्रूट्स या चॉकलेट स्ट्रिप्स डालकर सजाएं और सर्व करें.

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?

लोहड़ी एक पारंपरिक पंजाबी और उत्तर भारत का त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से खेतों की खुशहाली और फसल कटाई के जश्न के रूप में मनाया जाता है. ये मकर संक्रांति से एक दिन पहले यानी जनवरी के महीने में आता है और ठंड के मौसम के अंत का प्रतीक माना जाता है. लोहड़ी का सबसे बड़ा उद्देश्य सूर्य की ओर धन्यवाद देना और अगली फसल के लिए आशीर्वाद लेना होता है. लोग इस दिन आग के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, उसके चारों ओर हल्दी, तिल, मूंगफली, और रेवड़ी डालते हैं और गीत-संगीत के साथ नाचते-गाते हैं . साथ ही सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं.

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