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शादी में 7 नहीं अब होंगे 8 फेरे! बेटियों को बचाने के लिए गहोई समाज की अनोखी पहल, जानें क्या है इस ‘आठवें वचन’ का मतलब

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छतरपुर: हिन्दू रीति रिवाज की शादियों में प्राचीन समय से ही सात वचनों की परंपरा चली आई है. लेकिन छतरपुर में गहोई समाज के द्वारा अब शादियों में एक नई परंपरा शुरू कर दी है. जिसमें 7 नहीं आठ वचन वर वधू को लेने होंगे. आठवां वचन ”बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों में लड़कियों की सख्या बढ़ सके. गहोई समाज में लगातार लड़कियों की सख्या में गिरावट आ रही है.

छतरपुर में मना गहोई दिवस
शहर का गहोई समाज गरीब निर्धन और जरूरतमंद बेटियों की शादी कराने के लिए एक सामाजिक कार्य हर साल अयोजित करता है. जिसे ‘गहोई दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर समाज के द्वारा महीनों से तैयारी शुरू कर दी जाती है और समाज के लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. इस वर्ष गहोई समाज के द्वारा सामूहिक कन्याय विवाह में एक नहीं परम्परा शुरू की गई. जो भी वर वधु शादी करेंगे वह 7 नहीं 8 वचन लेंगे और आठ वचन के साथ शादी सम्पन्न होगी.

बेटियों को बचाने आठवां वचन
आठवां वचन बेटियों को पढ़ाने और बचाने के लिए रखा गया है. जिसकी अब शहर में चर्चाओं के साथ समाज की सराहना भी हो रही है. छतरपुर में गहोई समाज के द्वारा गहोई दिवस मनाया जाता है. इस आयोजन में समाज के लोग एकत्रित होते हैं और भव्य आयोजन करते हैं. इस दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. जिसमें बैंडबाजों के साथ डीजे की धुन पर समाज की महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी डांस करते हुए निकलते हैं.

सामूहिक विवाह में दिलवाए 8 वचन
इस बार शोभायात्रा का शुभारंभ बुंदेलखंड गैरेज से शुरु हुआ. यात्रा फब्बारा चौराहा, हटवारा, गांधी चौक, गल्ला मंडी होते हुए गहोई धाम पहुंची थी. शोभायात्रा में महिलाओं में जमकर उत्साह भी देखा गया. रास्ते में जगह-जगह गहोई बंधुओं, गहोई यूथ क्लब, अग्रवाल समाज ने यात्रा का भव्य स्वागत किया तो वही कई रंगारंग कार्यक्रम अयोजित हुए. रात में एक सामूहिक कन्या विवाह का आयोजन किया गया. जिसमें 4 विवाह सम्पन्न हुए. लेकिन इस आयोजन में खास बात ये रही कि सभी वरवधू को 7 नहीं 8 वचन दिलवाए गए.

क्यों लिए शादी में 8 वचन
हिन्दू रीति रिवाज से होने वाली शादियों में 7 वचन वर वधू लेते हैं, लेकिन छतरपुर के गहोई समाज के द्वारा हुए सामूहिक कन्या विवाह में 8 वचन दिलवाए गए. गहोई समाज के राजेश रूसिया बताते हैं, ”समाज में लगातार लड़कियों की सख्या घट रही है, जिसको लेकर एक वचन शादी में दिलवाता गया है ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जिससे आने वाली पीढ़ियों में लड़कियों की सख्या बढ़ेगी.”

वहीं, गहोई समाज द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादियों को करवाने वाले ब्राह्मण पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं. ”हिन्दू रीति रिवाज में शादी समारोह में 7 वचन होते हैं लेकिन गहोई समाज की परंपरा के अनुसार 8 वचन दिलवाए गए हैं. महिलाओं और बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ का वचन दिलवाया गया है.”

लड़कियों की घटती संख्या को लेकर लिया फैसला
गहोई समाज के सचिव राजेश रूसिया बताते हैं, ”समाज में लगातार लड़कियों की संख्या घट रही है, जिसको लेकर समाज ने निर्णय लिया और एक और वचन शादी में जोड़ा गया.” जब वर-वधु से बात की तो दुल्हन डोली ने बताया, ”8 वां वचन भी लिया गया है ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का.” दूल्हा सत्यम ने कहा, ”नई परंपरा से समाज में महिलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, भ्रुण हत्या नहीं होगी. हम ने भी शादी में आठवां वचन लिया है.”

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