Local & National News in Hindi

कौन था मायावी कालनेमि? जिसका जिक्र कर CM योगी ने विरोधियों को घेरा; जानिए रामायण की वो खौफनाक कथा

36

प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य से संबंधित हालिया विवाद के बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर तीखी और साफ बातें कही हैं. सीएम योगी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि आज धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. ऐसे लोगों से समाज को सावधान रहने की जरूरत है.

इतना ही नहीं सीएम योगी ने ऐसे लोगों को ‘कालनेमि’ बता दिया. उन्होंने कहा कि ये लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन अंदर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं. एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं है. संन्यासी की असल संपत्ति उसका धर्म और राष्ट्र का स्वाभिमान होता है, लेकिन आइए उस कालनेमि के बारे में जान लेते हैं, जिसका सीएम योगी ने जिक्र किया. आखिर कौन था कालनेमि?

कौन था कालनेमि?

कालनेमि एक राक्षस था, जिसका जिक्र रामायण में मिलता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार,कालनेमि रावण के मामा मारीच का पुत्र था. वो लंकापति रावण की सेना का एक शक्तिशाली राक्षस था. वो रावण की सेवा में रहकर उसके आदेशों को पूरा करता था. कालनेमि सिर्फ बलवान ही नहीं, बल्कि बल्कि चालाक और मायावी राक्षस था. वह छल-कपट से अपने कार्य को करने में माहिर था.

यही वजह है कि हनुमान जी को रोकने के लिए रावण ने कालनेमि को बुलाया था. दरअसल, लंका में युद्ध के दौरान रावण के पुत्र मेघनाद ने लक्ष्मण जी को शक्ति मारकर अचेत कर दिया था. उनके प्राण संकट में थे. तब सुशेण वैद्य ने श्रीराम को द्रोण पर्वत से सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी लाने के बारे में बताया. फिर भगवान श्रीराम के आदेश पर हनुमान जी तुरंत आकाश मार्ग से द्रोण पर्वत की ओर निकल पड़े.

बजरंगबली को रोकने के लिए बना था साधु

ये समाचार जब रावण को मिला तो उसने हनुमान जी को रोकने के लिए कालनेमि को बुलाया. इसके बाद कालनेमि ने एक साधु का वेश धारण किया और माया से रास्ते में एक सुंदर आश्रम बना दिया. साथ ही एक शांत सरोवर का भी निर्माण कर दिया. हनुमान जी को आकाश मार्ग से जाते समय क तपस्वी का सुंदर आश्रम दिखा. वो वहां उतरे. साधु बने कालनेमि ने उन्हें आदरपूर्वक आमंत्रित किया.

इसके बाद कालनेमि ने उनको स्नान, फलाहार और विश्राम करने के लिए कहा. हनुमान जी पहले तो रुके नहीं, पर जब उन्होंने साधु के सरल वचन सुनें तो थोड़ी देर वहां रुकने का निश्चय किया. फिर जब वो स्नान के लिए सरोवर में गए तो वहां पर राक्षसी रूपी मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया. पवनपुत्र ने तुरंत उसे मार गिराया.

हनुमान जी ने किया था वध

मरते समय उस राक्षसी ने कहा कि वो कोई साधु नहीं, रावण का दूत कालनेमि है. वहीं जब कालनेमि को ये पता चल गया कि हनुमान जी के सामने उसका भेज खुल चुका है, तो उसने बजरंगबली से युद्ध प्रारंभ कर दिया, लेकिन हनुमान जी ने एक ही प्रहार से उसे मार गिराया और फिर संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोण पर्वत की ओर बढ़ गए.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Please Pay your remaining balance to remove this banner !
इस बैनर को हटाने के लिए कृपया अपनी शेष राशि का भुगतान करें !