इटावा जिले के जसवंतनगर क्षेत्र के जल पोखरा गांव में एक अजीब घटना सामने आई है. यहां एक नीम के पेड़ से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ निकलने की घटना की चारों ओर चर्चा हो रही है. करीब 15 दिनों से लगातार निकल रहे इस तरल पदार्थ को लोग आस्था से जोड़ रहे हैं. दूर दराज से श्रद्धालु पेड़ की पूजा अर्चना करने के लिए पहुंच रहे हैं. पेड़ के पास भजन कीर्तन हो रहे हैं और इतना ही नहीं लोग इसे बीमारियों में लाभकारी मानकर सेवन भी कर रहे हैं. वहीं कृषि वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक कारणों से जोड़कर देख रहे हैं.
इलाके में जमुना बाग के पास जल पोखरा गांव में उस समय हलचल मच गई, जब एक ढाबे के पीछे स्थित नीम के पेड़ से सफेद तरल पदार्थ निकलता दिखाई दिया. यह नीम का पेड़ अजय कुमार के खेत में बताया गया है. दिन के समय इस तरल पदार्थ को पेड़ से टपकता देखा गया, जिसके बाद गांव में इसकी चर्चा तेजी से फैल गई.
पेड़ की पूजा कर रहे लोग
सूचना फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे. देखते ही देखते यह जगह लोगों की भीड़ से भर गई. कई लोगों ने इस तरल को चमत्कार मानते हुए इसे देवी माता की कृपा बताया. वहीं महिलाओं को पेड़ के पास भक्ति गीतों पर झूमते और पूजा करते देखा गया.
तरल पदार्थ का सेवन कर रहे लोग
नीम का यह पेड़ अब पूजा पाठ और प्रसाद वितरण का केंद्र बन गया है. लोग पेड़ पर चढ़ावा चढ़ा रहे हैं. साउंड सिस्टम लगाकर भजन कीर्तन हो रहे हैं. पेड़ से निकलने वाले तरल पदार्थ को लोग प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जा रहे हैं और दूसरे स्थानों पर भी इसका सेवन कर रहे हैं.
पुजारी धर्मेंद्र शास्त्री का कहना है कि प्रतिदिन 6 से 7 लीटर तरल पदार्थ पेड़ से निकल रहा है. यहां प्रतिदिन 500 से अधिक श्रद्धालु यहां आ रहे है. श्रद्धालु इसको देवी का स्थान मान रहे हैं. लोगों की आस्था है. बाकी क्या है यह, हम लोगों को नहीं पता है.
प्रसाद के रूप में ले जा रहे घर
तरल पदार्थ का सेवन करने वाले लोगों का कहना है कि इसका स्वाद नारियल पानी जैसा है. कुछ लोगों का दावा है कि इसके सेवन से खुजली और दर्द में राहत मिल रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज भी यहां इसे दवा के रूप में लेने के लिए पहुंच रहे हैं.
क्या कहना है कृषि विभाग का?
वहीं कृषि उपनिदेशक का कहना है कि नीम के पेड़ से इस तरह का रस निकलना प्राकृतिक कारणों से भी हो सकता है. उनके अनुसार जड़ों पर अधिक दबाव और धूप की कमी के कारण पेड़ों से ऐसा तरल निकलने की संभावना रहती है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बावजूद इलाके में आस्था का माहौल बना हुआ है. उन्होंने कहा कि धूप निकलने के बाद यह तरल पदार्थ निकलना बंद हो जाएगा.
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