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Kurukshetra Pashu Mela: कुरुक्षेत्र मेले में ऊंटनी की कैटवॉक ने जीता दिल, महेंद्रगढ़ की ‘सुंदरी’ प्रतियोगिता में आई प्रथम

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कुरुक्षेत्र  : कुरुक्षेत्र के मेला ग्राउंड में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पशु मेला का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में हरियाणा के अलग-अलग राज्यों से पशुपालक अलग-अलग कैटेगरी में पशु लेकर पहुंचे हैं। वहीं हरियाणा राजस्थान की सीमा से लगते जिले महेंद्रगढ़ से पशुपालक ऊंट लेकर यहां पर पहुंचे हैं। यहां पर प्रतियोगिता में भाग लेने के साथ-साथ ऊंट मेले में आए हुए लोगों का मनोरंजन करने के लिए स्टेज पर कैटवॉक करके लोगों को खूब मनोरंजन कर रहे हैं। ऊंट की ऐसी कैटवॉक शायद ही पहले आपने देखी होगी, जहां पर मेले के अंदर गानों पर ऊंट थिरकते हुए नजर आए।

ऊंट के मालिक जगदेव ने बताया कि वह महेंद्रगढ़ से यहां पर मेले में पहुंचे हैं, उनके पूर्वज कई पीढ़ियों से ऊंट पालने का काम करते आ रहे हैं और उनसे ही उनकी रोजी-रोटी चलती है और उनसे ही वह खेती-बाड़ी करते हैं। यहां पर वह अपने मादा ऊंट को लेकर पहुंचे हैं जिनको सुंदरता में प्रथम पुरस्कार मिला है और यह उनके लिए काफी बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकारी मेलों में ही ऊंट की प्रदर्शनी और कंपटीशन लड़े जाते हैं, प्राइवेट मेलों से तो हमारे ऊंट गायब ही हो गए है। बिहार सरकार का एक अच्छा कदम है।

इस मादा ऊंट की कीमत कीमत डेढ़ लाख रूपए

उन्होंने बताया कि उनके इस मादा ऊंट की कीमत डेढ़ लाख रूपए है, जिसकी उम्र 3 वर्ष है। उन्होंने कहा कि जिस मादा ऊंट ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है, वह पहले भी दो बार अलग-अलग मेलों में प्रथम आ चुकी है। उन्होंने बताया कि आजकल हरियाणा में ऊंट बहुत कम रह गए हैं, लेकिन वह अब भी ऊंट से ही अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। उससे हल में जोत कर खेती भी करते हैं। हालांकि यहां पर करीब 6 से 7 पशुपालक ऐसे पहुंचे हैं जो ऊंट को लेकर यहां पर मेले में आए हैं और सबसे बड़ी बात यह ऊंट काफी ऊंचे कद के है। उनके बालों की कटिंग भी हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है, क्योंकि बालों की कटिंग उनकी सुंदरता में चार चांद लगा रही है।

उन्होंने कहा कि इनको खाने में कुछ अलग से नहीं दिया जाता जो उनके घर का ही अनाज होता है उसको मिक्स करके वह उसको देते हैं और इसके रख-रखाव में भी ज्यादा परेशानी नहीं होती लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि आजकल हरियाणा में ऊंट की संख्या कम हो गई है लेकिन वह अपने इस पुस्तैनी काम को आगे बढ़ाने के लिए अब भी पालने का काम कर रहे हैं।

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