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प्रधानमंत्री शुक्रवार को RBI रिटेल डायरेक्‍ट स्‍कीम और एकीकृत लोकपाल योजना का करेंगे शुभारंभ

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ग्राहक केंद्रित दो नए इनोवेटिव भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रिटेल डायरेक्‍ट स्‍कीम और एकीकृत लोकपाल योजना का शुभारंभ करेंगे। गुरुवार को एक बयान में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से बताया गया कि RBI खुदरा प्रत्यक्ष योजना का उद्देश्य खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूति बाजार तक पहुंच बढ़ाना है। यह उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी प्रतिभूतियों में सीधे निवेश के लिए एक नया अवसर देता है। बयान के मुताबिक, निवेशक आसानी से आरबीआई के साथ अपने सरकारी प्रतिभूति खाते मुफ्त में ऑनलाइन खोल और मेंटेन कर सकेंगे

रिजर्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना का उद्देश्य विनियमित संस्थाओं के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र में और सुधार करना है। पीएमओ से जारी बयान के मुताबिक योजना का केंद्रीय विषय ग्राहकों के लिए अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए एक पोर्टल, एक ई-मेल पता और एक डाक पते के साथ “एक राष्ट्र-एक लोकपाल” पर आधारित है। ग्राहकों के लिए अपनी शिकायत दर्ज करने, दस्तावेज जमा करने, अपनी शिकायतों की स्थिति को ट्रैक करने और जवाब देने के लिए एक ही रेफरेंस नंबर होगा। एक बहुभाषी टोल-फ्री फोन नंबर शिकायत निवारण और शिकायत दर्ज करने में सहायता के बारे में सभी जरूरी जानकारी देगा।

खाद्यान्नों को शत-प्रतिशत जूट की बोरियों में पैक करना अनिवार्य

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जूट उद्योग के प्रोत्साहन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को पैकिंग में जूट के अनिवार्य उपयोग के लिए आरक्षण नियमों को मंजूरी दी। इसके तहत खाद्यान्नों को 100 प्रतिशत तो 20 प्रतिशत चीनी को जूट की बोरियों में अनिवार्य रूप से पैक करना होगा। सरकार के इस फैसले से जूट उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और 3.7 लाख से अधिक श्रमिकों को राहत मिलेगी। साथ ही 40 लाख किसानों की आजीविका में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा पर्यावरण सुरक्षा में भी मदद मिलेगी, क्योंकि जूट एक प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल, नवीकरणीय और पुन: उपयोग किए जाने वाला फाइबर है।

जूट पैकिंग सामग्री में पैकिंग के आरक्षण से देश में वर्ष 2020-21 के दौरान लगभग 66.57 प्रतिशत कच्चे जूट की खपत हुई। जूट उद्योग का सामान्य रूप से भारत की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में और विशेष रूप से पूर्वी क्षेत्र यानी पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम, त्रिपुरा, मेघालय, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पूर्वी क्षेत्र, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में एक प्रमुख उद्योग है।

काटन खरीद के बदले सीसीआइ को 17,408.85 करोड़ रुपयेपिछले सात सालों 2014-15 से 2020-21 में एमएसपी के बराबर के मूल्य किसानों से काटन की खरीद की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने सीसीआइ को 17,408.85 करोड़ रुपये देने का फैसला किया। सीसीआइ के इस फैसले से काटन किसानों को काफी राहत मिली थी।

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