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हलाल मीट वाले डाइट प्लान पर आया BCCI का रिएक्शन, अधिकारी ने दिया ये बयान

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों को खाने के प्रकार के बारे में कोई निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि टीम का मेन्यू तय करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है और खिलाड़ी यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं कि वे क्या खाना चाहते हैं और क्या नहीं। कोषाध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि बोर्ड ने किसी भी खिलाड़ी को खाने से संबंधित कोई सलाह नहीं दी है।

रिपोर्ट्स सामने आई थी कि बीसीसीआइ ने टीम के लिए एक नया डाइट प्लान पेश किया है, जिसके अनुसार खिलाड़ियों को पोर्क या बीफ नहीं खाने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बीसीसीआइ ने खिलाड़ियों से केवल हलाल मीट का सेवन करने को कहा। इसके बाद विवाद छिड़ गया, क्योंकि ये रिपोर्ट इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें कई लोगों ने हलाल मांस को बढ़ावा देने के लिए क्रिकेट बोर्ड की आलोचना की।

बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने इस तरह की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया और उन्होंने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, “इस (डाइट प्लान) पर कभी चर्चा नहीं हुई और न ही इसे लागू किया जाएगा। मुझे नहीं पता कि यह फैसला कब लिया गया था या नहीं। जहां तक मेरी जानकारी है, हमने कभी भी डाइट प्लान से संबंधित कोई गाइडलाइन जारी नहीं की। जहां तक खान-पान की बात है तो यह खिलाड़ियों की व्यक्तिगत पसंद है, इसमें बीसीसीआइ की कोई भूमिका नहीं है।”

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यह समझाते हुए कि यह ‘हलाल’ किसी भी समय किसी भी खिलाड़ी की प्रतिक्रिया पर हुआ होगा, उन्होंने आगे विस्तार से बताया, “उदाहरण के लिए, यदि कोई खिलाड़ी कहता है कि वह गोमांस नहीं खाता है और यदि कोई विदेशी टीम आती है तो खाना एक साथ नहीं होना चाहिए। इस हलाल मुद्दे को कभी भी बीसीसीआइ के ध्यान में नहीं लाया गया। बीसीसीआइ अपने किसी भी खिलाड़ी को यह सलाह नहीं देता है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। खिलाड़ी अपना भोजन स्वयं चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। वे शाकाहारी बनना चाहते हैं, यह उनकी पसंद है, वे वीगन बनना चाहते हैं, यह उनकी पसंद है, चाहे वे मांसाहारी बनना चाहते हैं, यह उनकी पसंद है।”

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