New Year
Breaking
भूकंप से कांप गई पाकिस्तान की धरती ट्रांसमिशन सर्विस एग्रीमेंट हस्ताक्षरित  रीवा की अवनि चतुर्वेदी ने जापान में फाइटर प्लेन उड़ाकर रचा एक और इतिहास PM नरेंद्र मोदी ने की मंत्रिपरिषद के साथ बैठक, बजट से पहले कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान में चिन्हित हितग्राहियों को 5 फरवरी से मिलेगा योजना का लाभ विजय चौक पर भारतीय धुनों से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक कराची में बड़ा सड़क हादसा खाई में गिरी बस, 37 लोगों की मौत, 4 घायल सरकार बढ़ा सकती है उज्ज्वला योजना का बजट... लखनऊ समेत 53 जिलों में ठंडी हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थक व भारतीय भिड़े, 2 गिरफ्तार

योगी आदित्यनाथ के लिए आई बड़ी खुशखबरी, यूपी में कृषि कानून नहीं है प्रमुख चुनावी मुद्दा

Whats App

नई दिल्ली। कृषि कानून वापस लिए जाने के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व अन्य मुद्दों के नाम पर उत्तर प्रदेश (उप्र) और पंजाब की सीमा पर रार जारी है। इस बीच, दिल्ली, पंजाब, लखनऊ और बनारस विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के सर्वे में भारतीय जनता पार्टी के लिए राहत की बात सामने आई है। यह सर्वे बता रहा है कि इस बार उत्तर प्रदेश और पंजाब में कृषि कानून प्रमुख चुनावी मुद्दा नहीं होगा। सर्वे में मतदाताओं ने कृषि कानूनों पर चल रही रार को बहुत अधिक तव्वजो नहीं दी है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावों के मद्देनजर दिल्ली व अन्य तीनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने यह जानने का प्रयास किया कि मतदाता किन मसलों पर मतदान करेंगे।

इस दौरान 400 से अधिक शोधार्थियों ने 11 हजार से अधिक मतदाताओं से बातचीत कर रिपोर्ट को तैयार किया। इसमें मतदाता महंगाई, रोजगार, महिला सुरक्षा व कानून व्यवस्था को बड़ी समस्या मानते हैं। खास बात यह है कि कृषि कानूनों को लेकर साल भर तक दिल्ली की सीमा पर चले प्रदर्शन का मतदाताओं पर कोई खास असर नहीं है। दोनों राज्यों के मतदाताओं में महज 8.2 प्रतिशत ही इसे चुनावी मुद्दा मानते हैं। इसमें यदि उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां सिर्फ 4.3 प्रतिशत ने ही इसे प्रमुख मुद्दा बताया, जबकि पंजाब में 14.8 प्रतिशत लोगों ने इसे प्रमुख मुद्दा माना। अध्ययन से यह भी पता चला कि पंजाब के ग्रामीण इलाकों में कृषि कानून को चुनावी मुद्दा मानने वाले लोग ज्यादा हैं।

सभी जिलों में किया गया सर्वे

Whats App

दिल्ली विश्वविद्यालय के वैश्विक अध्ययन केंद्र ने सर्वे की पहल की। उत्तर प्रदेश के सभी 75 और पंजाब के 22 जिलों में सर्वे किया गया। केंद्र के निदेशक प्रो.सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि 14 से 28 नवंबर के बीच किए गए सर्वे में मतदाताओं से कृषि कानून, मंहगाई, कानून व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, ड्रग्स, विकास एवं सुशासन पर सवाल पूछे गए। सर्वे में उत्तर प्रदेश के 6930 और पंजाब के 4144 मतदाता शामिल हुए।

भूकंप से कांप गई पाकिस्तान की धरती     |     ट्रांसमिशन सर्विस एग्रीमेंट हस्ताक्षरित      |     रीवा की अवनि चतुर्वेदी ने जापान में फाइटर प्लेन उड़ाकर रचा एक और इतिहास     |     PM नरेंद्र मोदी ने की मंत्रिपरिषद के साथ बैठक, बजट से पहले कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा     |     मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान में चिन्हित हितग्राहियों को 5 फरवरी से मिलेगा योजना का लाभ     |     विजय चौक पर भारतीय धुनों से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक     |     कराची में बड़ा सड़क हादसा खाई में गिरी बस, 37 लोगों की मौत, 4 घायल     |     सरकार बढ़ा सकती है उज्ज्वला योजना का बजट…     |     लखनऊ समेत 53 जिलों में ठंडी हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन     |     ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थक व भारतीय भिड़े, 2 गिरफ्तार     |    

पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9431277374