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कर्नाटकः फ्लोर टेस्ट से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला, 14 विधायक आयोग्य करार

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नई दिल्लीः कर्नाटक में बीजेपी के सीएम बी.एस येदियुरप्पा ने शपथ तो ले ली है, लेकिन अभी सोमवार को असल परीक्षा होनी बाकी है। अभी संसद में येदियुरप्पा का फ्लोर टेस्ट होना है, लेकिन उससे पहले स्पीकर ने बड़ा फैसला लिया है और 14 बाकी विधायकों को आयोग्य करार दिया है। इसी के साथ 14 विधायकों की सदस्यता भी रद्द कर दी गई है। इन में जनता दल के 3 विधायक और कांग्रेस के 11 विधायक मौजूद है। इससे पहले गुरुवार को स्पीकर ने 3 विधायकों को अयोग्य करार दिया था, यानी अब कुल 17 बागी विधायक अयोग्य करार दिए जा चुके हैं।14 विधायकों को अयोग्य करार देने के बाद स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि मैंने कोई चालाकी या ड्रामा नहीं किया, बल्कि सौम्य तरीके से फैसला लिया है।

कुल 17 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद कर्नाटक विधानसभा की संख्या 207 रह गई। इस हिसाब से बहुमत का आंकड़ा 104 विधायकों का रह गया। एक सदस्य मनोनीत है। कुल संख्या 105 विधायकों की है। बीजेपी के पास फिलहाल 105 विधायकों का समर्थन है, जैसा कि पिछले ट्रस्ट वोट में कुमारस्वामी के पक्ष में 99 और विपक्ष में 105 वोट पड़े थे।

इससे पहले स्पीकर रमेश कुमार ने तीन विधायकों को अयोग्य करार दिया था। आज यानी 14 विधायकों के अयोग्य करार देने के बाद अब कुल 17 विधायक अयोग्य करार दिए जा चुके हैं। स्पीकर रमेश कुमार के इस फैसले के बाद विधानसभा में विधायकों की संख्या 207 बची है। यानी बहुमत के लिए 105 जादुई आंकड़ा होगा।

लंबे वक्त तक चले सियासी नाटक के बाद गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने तीन बागी विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था। इन विधायकों में आर. शंकर, रमेश जरकिहोली और महेश कुमथल्ली के नाम हैं। बाकी 14 बागी विधायकों के इस्तीफे पर स्पीकर रमेश कुमार ने कहा था कि ‘मेरे पास कई शिकायतें हैं, मुझे फैसले के लिए और वक्त चाहिए। ऐसे मामले की स्टडी करनी पड़ती है।’ इसके बाद रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पीकर रमेश कुमार ने बाकी 14 विधायकों को अयोग्य घोषित करने का फैसला किया।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते विश्वास प्रस्ताव पर चार दिनों की बहस के बाद एच. डी. कुमारस्वामी की सरकार गिर गई थी। विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जद-एस) की गठबंधन सरकार विश्वास मत हासिल नहीं कर सकी। 225 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत के लिए 20 विधायक सदन में उपस्थित नहीं हुए थे।

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