बिलासपुर। प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने मोर्चा, संगठन व प्रकोष्ठ की कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। इसके साथ नियमानुसार पूर्व के पदाधिकारियों का पद अपने आप समाप्त हो जाता है। देखने में यह आ रहा है कि पूर्व में मोर्चा, संगठन व प्रकोष्ठ में जिनको जिम्मेदारी दी गई थी, अधिकांश अब भी पदनाम का दुस्र्पयोग कर रहे हैं। पीसीसी ने इसे गंभीर अनुशासहीनता की श्रेणी में माना है। मिल रही शिकायतों के मद्देनजर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री प्रशासन चंद्रशेखर शुक्ला ने मोर्चा, संगठन व प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्षों को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी मांगी है।
पीसीसी के महामंत्री प्रशासन की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संगठन के अंतर्गत आने वाले सभी मोर्चा, संगठन, प्रकोष्ठ में नई नियुक्तियों से पहले जिला व शहर कांग्रेस कमेटी की सहमति को अनिवार्य कर दिया है। इनकी सहमति के बगैर नियुक्तियों को वैध नहीं माना जाएगा। महामंत्री प्रशासन ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि मोर्चा संगठन व प्रकोष्ठ विभाग में किसी भी पद पर नियुक्ति के पहले संबंधित जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की सहमति एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा। इनकी सहमति लिए बगैर की गई नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से अमान्य माना जाएगा। पीसीसी की ओर से जारी इस पत्र में जारी निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
पूर्व पदाधिकारी अब भी कर रहे दुरुपयोग
मोर्चा, संगठन व प्रकोष्ठ में जिन कांग्रेसजनों की नियुक्ति की गई थी वे अब भी खुद को उसी पद पर मान रहे हैं और सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण विभिन्न कार्यालयों से लेकर अन्य जगहों पर पदनाम का जमकर उपयोग भी कर रहे हैं। अब भी मोर्चा, प्रकोष्ठ व संगठन के पूर्व हो चुके पदाधिकारी पदनाम लिख रहे हैं। पदनाम का उपयोग सार्वजनिक रूप से भी कर रहे हैं।
इनकी कार्यकारिणी हो गई है भंग
पिछड़ा वर्ग, किसान कांग्रेस, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कार्यकारिणी भंग हो गई है।
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