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अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी के सामने कांग्रेस को खड़ा करने की बड़ी चुनौती

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कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी कमेटी ने शनिवार देर रात सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाने का फैसला किया। सोनिया गांधी ने इसे स्वीकार कर लिया है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी के सामने इस साल होने वाले चार राज्यों (दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड) के चुनावों में बड़ी चुनौती है। इससे पहले भी कांग्रेस ने 2004 और 2009 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाई थी
सोनिया गांधी के सामने हैं बड़ी चुनौती
एक ओर कांग्रेस के कद्दावर नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। उन्हें रोकना सोनिया के सामने बड़ी चुनौती होगी। बता दें कि हाल ही में अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस के रुख को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता भुवनेश्वर कालिता और शनिवार को पूर्व राज्यसभा सांसद एस कुजूर ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। कालिता शुक्रवार को भाजपा का दामन थाम लिया है।

दिल्लीः राजधानी में कभी अपने दम पर लगातार 15 साल तक राज करने वाली कांग्रेस आज दिल्ली में अपना वजूद तलाश रही है। मौजूदा समय में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और इस साल के अंत तक राजधानी में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। पार्टी को 70 विधानसभा सीटों पर बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, 2014 और 2019 के आम चुनाव में भी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। राजधानी में शीला दीक्षित के निधन के बाद कांग्रेस को नए अध्यक्ष की तलाश है तो वहीं, पार्टी में अंदरूनी घमासान भी जारी है।

हरियाणाः सोनिया गांधी के सामने दूसरी बड़ी चुनौती दिल्ली से सटे राज्य हरियाणा में है। यहां भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में लगातार दो बार सरकार बनाई। लेकिन 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को भाजपा के सामने बड़ी हार का सामना करना पड़ा था और पार्टी ने न केवल सत्ता गंवाई बल्कि तीसरे नंबर की पार्टी बनीं। सोनिया गांधी के सामने हरियाणा में कांग्रेस को खड़ा करने की बड़ी चुनौती है।

महाराष्ट्रः महाराष्ट्र में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। यहां पर सोनिया गांधी को कई मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा। एक ओर पार्टी अंदरूनी कलह का सामना कर रही है। लोकसभा चुनाव से पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए गए संजय निरुपम खुलकर मिलिंद देवड़ा के सामने आ गए थे। महाराष्ट्र में न केवल एनसीपी समेत अन्य स्थानीय राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलना होगा, बल्कि राज्य में सीटों के बंटवारे को लेकर भी कांग्रेस और सोनिया गांधी को दो-चार होना पड़ सकता है। यहां पर कांग्रेस के सामने भाजपा-शिवसेना का गठबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। महाराष्ट्र में भी नेताओं का पार्टी छोड़कर जाने का सिलसिला जारी है। लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यहां 48 लोकसभा सीट में पार्टी को सिर्फ एक सीट पर ही जीत मिली है।

झारखंडः कांग्रेस का तीनों राज्यों की तरह लगभग हाल यहां भी है। पार्टी अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है। झारखंड में मौजूदा वक्त में भाजपा गठबंधन की सरकार है। शुक्रवार को राज्य में कांग्रेस की कलह खुलकर सामने आ गई, जब कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कुछ वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। झारखंड में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

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