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नॉर्वे की मस्जिद में गोलीबारी में एक घायल, पुलिस ने संदिग्ध को किया गिरफ्तार

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ओस्लो। कई हथियारों से लैस एक बंदूकधारी ने शनिवार को नार्वे की राजधानी ओस्लो के पास एक मस्जिद में गोलीबारी की। पुलिस और गवाहों ने बताया कि एक बुजुर्ग ने हमलावर के मंसूबों को नाकाम करते हुए उसे बड़ी तबाही फैलाने से पहले ही काबू में कर लिया। गिरफ्तार संदिग्ध से जुड़ा एक “मृत व्यक्ति” बैरम के उपनगर के एक घर में पाया गया, जहां मस्जिद पर हमला हुआ था।

मस्जिद के प्रमुख ने हमलावर के बारे में बताया कि वह काले रंग के कपड़े पहने एक युवा श्वेत व्यक्ति था। उसने हेलमेट और बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी हुई थी। शाम 4 बजे के बाद ओस्लो उपनगर के अल-नूर इस्लामिक सेंटर में गोलीबारी के बारे में पुलिस को सूचना दी गई थी। पुलिस को पहले बताया गया था कि पीड़ित को गोली मार दी गई थी, लेकिन बाद में कहा गया कि व्यक्ति को मामूली चोटें आई थीं और यह स्पष्ट नहीं था कि वह बंदूक की गोली से घायल हुआ था या नहीं।

नॉर्वे में जुलाई 2011 में एक दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन ने सबसे बुरे भयानक हमले को अंजाम दिया था, जिसमें एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने 77 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस ने कहा कि इस बात का कोई संकेत नहीं है कि गिरफ्तार किए गए युवक के अलावा अन्य लोग शनिवार की घटना में शामिल थे। ओस्लो पुलिस के प्रवक्ता रूने ने बताया कि वह नॉर्वे का ही रहने वाला एक युवक है। वह आस-पास के क्षेत्र में रहता है।

मस्जिद के प्रमुख इरफान मुश्ताक ने मीडिया को बताया कि हमारे एक सदस्य को गोरे व्यक्ति ने गोली मारी है। मुश्ताक ने कहा कि आदमी ने कई हथियार चलाए थे, लेकिन मस्जिद में इबादत कर रहे 75 वर्षीय एक बुजुर्ग ने उसे काबू में कर लिया था, जो वहां कुरान पढ़ रहा था। मुश्ताक ने कहा कि बंदूकधारी के बारे में खबर मिलते ही वह तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचे थे और पुलिस के आने का इंतजार करते हुए इमारत के पीछे चले गए थे।

मुश्ताक ने बताया कि वहां कारतूस बिखरे हुए थे और कालीनों पर खून पड़ा था। वहां मैंने हमारा एक सदस्य को खून से लथपथ बैठे हुए देखा था। उन्होंने बताया कि शूटिंग के बाद मस्जिद को कोई धमकी नहीं मिली थी। बताते चलें कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब मुस्लिम त्योहार ईद अल-अधा को मनाने की तैयारी चल रही थी। यह त्योहार मुस्लिम तीर्थयात्रा हज के खत्म होने को चिह्नित करता है। पुलिस ने कहा कि वे जांच रहे हैं कि “सुरक्षा में और सुधार” के लिए क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है।

बताते चलें कि संयुक्त राज्य अमेरिका और न्यूजीलैंड सहित पश्चिमी देशों में हाल ही में श्वेत राष्ट्रवादी हमलों की शुरुआत हुई है। मार्च में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में दो मस्जिदों में गोलीबारी में 51 मुस्लिमों की हत्या कर दी गई थी। अब नॉर्वे के अल-नूर इस्लामिक सेंटर का नाम भी न्यूजीलैंड के हमलों के साथ जुड़ गया है।

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