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इन तस्वीरों को देख हैरान रह जाएंगे आप, कहीं और का नहीं भारत का है ये नजारा

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नई दिल्लीः दिल्ली की आबोहवा इन दिनों इतनी खराब हुई पड़ी है कि वहां के लोगों के लिए सांस तक लेना मुहाल हुआ पड़ा है। यह तो बात हुई वायु प्रदूषण की लेकिन अगर भारत की नदियों और जल स्तोत्रों की बात करें तो वो भी अब साफ नहीं रहे हैं। कुछ ऐसी ही तस्वीरों हम आपको दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर एक बारगी तो आपको यकीन नहीं होगा कि यह नजारा भारत का है। यह जानकार आप और भी हैरान रह जाएंगे कि यह तस्वीरें दिल्ली की हैं जो इन दिनों वायु प्रदूषण से जूझ रही है। कहते हैं हवा के बिना हम सांस नहीं ले सकते लेकिन पानी के बिना तो जिंदगी की आस रखना भी मुस्किल है। लेकिन इसकी परवाह किसे है…हम तो गंदगी फैलाएंगे न। इसलिए चाहे, वो गंगा हो या फिर यमुना… या कोई अन्य नदी सब दूषित हो चुकी हैं।

यमुना का डरावना रूप
तो बता दें कि जो तस्वीरें हमने आपको दिखाई हैं वो उसे आप रशिया की Baikal नदी मत समझना और न ही यह समझना कि कही बर्फ जमी हुई है और लोग इसका आनंद उठा रहे हैं। छठ के मौके पर दिल वालों की दिल्ली से कुछ तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों में भारतीय महिलाएं किसी अंटार्कटिका में सूर्य देव को अर्घ्य नहीं दे रही हैं बल्कि यह यमुना का डरावना रूप नजर आ रहा है। जी हां यह दिल्ली की यमुना नदी की तस्वीरें हैं, जहां श्रद्धालु छठ समापन के लिए यमुना में खड़े होकार सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर रहे हैं। यमुना नदी पूरी तरह से सफेद जैसी बर्फ के साथ ढकी हुई है। लेकिन यह सफेद बर्फ नहीं है बल्कि रासायनिक फोम है जो बड़ी-बड़ी फैक्टरियों से निकला है।

फैक्टरियों से निकले कैमिकल्स के वेस्ट नदी में आकर जमा हो गए हैं जिससे यमुना ऐसी दिख रही है। फैक्टरियां ही नहीं हम लोग भी अपने घरों का कचरा इसमें ही बहाते हैं जिससे देश की कई नदियां इस तरह से दूषित हो रही हैं और इसके लिए हम किसी सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते जब तक हम जागरुक न होंगे कोई भी यंत्र और यत्न प्रदूषण कम नहीं कर सकता। हालांकि, सरकारें नदियों की सफाई पर काफी पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन गंदगी तस की मस बनी हुई है।

हर साल यही हाल
हालांकि कि पहली बार यमुना नदी का ऐसा नजारा देखने को नहीं मिला है, हर साल छठ के श्रद्धालु इसी रासायनिक फोम में खड़े होकर पूजा करते हैं। फिर एक साल के लिए हम इन तस्वीरों को भूल जाते हैं। लेकिन एक बात है वो दिन दूर नहीं है जब लोग नदी की जगह प्लाटिक के टब में पानी भर कर सूर्य देव को अर्घ्य देने को मजबूर हो जाएंगे।

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