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धुंध में हादसों से हर साल होती हैं 10 हजार मौतें, जानिए बचने के कुछ खास Tips

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लुधियाना: पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी होने से जहां मैदानी इलाकों में सर्दी बढ़ गई है वहीं कोहरे व धुंध ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। हर साल धुंध के कारण होने वाले सड़क हादसों में कई लोग काल का ग्रास बन जाते हैं। धुंध के सीजन में ड्राइविंग के दौरान कई सावधानियां बरतने की जरूरत है, वर्ना छोटी-सी लापरवाही किसी भयंकर हादसे का कारण बन सकती है। प्रात: व देर रात कई बार तो सड़कों पर विजिबिलिटी 5 मीटर से भी कम हो जाती है, जिससे ड्राइविंग करना तो दूर सोचना भी असंभव लगता है। अंतर्राष्ट्रीय रोड सेफ्टी एक्सपर्ट व राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा कौंसिल के सदस्य डा. कमलजीत सोई के अनुसार धुंध में ड्राइविंग करने से परहेज करना चाहिए। फिर भी अगर निकलना पड़े तो डा. सोई ने धुंध के दौरान कुछ ड्राइविंग टिप्स सांझा किए हैं। हमारे देश में धुंध के कारण होने वाले सड़क हादसों के दौरान हर वर्ष करीब 10 हजार लोग काल का ग्रास बन जाते हैं और इससे भी अधिक लोग अपाहिज हो जाते हैं। इसके साथ ही सरकार का हर वर्ष अरबों रुपए का नुक्सान भी होता है। धुंध में ड्राइविंग के दौरान बरती गई छोटी-सी लापरवाही कई परिवारों के लिए सारी उम्र का दुख बनकर रह जाती है।

ये हैं धुंध में हादसों के कारण

  • हैवी वाहनों के पीछे रिफ्लैक्टर न लगे होना।
  • सड़कों के किनारों पर अवैध तौर पर ट्रकों की पार्किंग।
  • ड्राइविंग के दौरान संयम का प्रयोग न करना।
  • हड़बड़ी मचाते हुए ओवरटेकिंग करना।
  • फोग लाइटों का प्रयोग न करना।
  • आगे चल रहे वाहनों से दूरी न बनाकर रखना।
  • बार-बार अपनी लेन बदलना।
  • गाड़ी के शीशों को साफ न रखना।
  • सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण।
  • सड़कों के गलत डिजाइन और गड्ढों के कारण।

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पैदल व साइकिल चालकों को भी नुक्सान का खतरा
धुंध के दौरान वाहनों के पैदल राहगीरों व साइकिल चालकों के साथ टक्कर होने का खतरा भी बना रहता है। धुंध में वाहन चालकों को अक्सर पैदल या साइकिल चालक दिखाई नहीं देते। हादसों से बचाव के लिए पैदल राहगीर चमकदार कपड़ों का प्रयोग व साइकिल चालक रिफ्लैक्टर का प्रयोग जरूर करें।

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ये हैं धुंध में ड्राइविंग करने के टिप्स

  • धुंध सुबह व रात के समय अपना रूप दिखाती है इसलिए इस समय ड्राइविंग से परहेज करें।
  • धुंध के दौरान सड़कों पर ट्रैफिक की गति सामान्य से कहीं अधिक कम हो जाती है, इसलिए सड़क पर वाहन चलाते समय संयम बरतें व वाहन धीरे चलाएं।
  • ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन, ईयरफोन या म्यूजिक से दूर रहें, यह आपका ध्यान भटका सकते हैं। कार के शीशे खुले रखें ताकि बाहर के ट्रैफिक की आवाज सुनाई दे सके।
  • ड्राइवर सहित सभी पैसेंजर सीट बैल्ट का प्रयोग जरूर करें। सीट बैल्ट लगी होने पर हादसे के दौरान शारीरिक नुक्सान का खतरा कम हो जाता है।
  • आगे जा रहे वाहनों से उचित दूरी बनाकर रखें। आगे निकलने की हड़बड़ी न मचाएं।
  • अगर वाहन पर फोग लाइटें लगी हों तो उन्हें जला लें अन्यथा लाइटें लो-बीम पर जलाएं। हाई बीम पर लाइटें जलाने पर रौशनी धुंध से टकराकर वापस चालक की आंखों में पड़ती है।
  • धुंध में ड्राइविंग के दौरान हमेशा पार्किंग लाइटें चालू रखें, इससे आगे व पीछे चल रहे वाहनों को आपका पता चलता रहता है।
  • धुंध के दौरान हमेशा एक ही लाइन पर वाहन चलाएं। ओवरटेकिंग करने या बार-बार लाइन बदलने से परहेज करें।
  • इस दौरान पैदल, साइकिल व दोपहिया वाहन चालकों का खास ध्यान रखें, उन्हें धुंध में बेहद कम दिखाई देता है। ड्राइविंग के दौरान पास बैठे साथी की सहायता लें।
  • धुंध में ड्राइविंग के दौरान सड़क पर चलते या बैठे आवारा जानवरों से बचाव रखें। धुंध में अक्सर जानवर दिखाई नहीं देते।
  • धुंध में अगर सामने बिल्कुल भी दिखाई न दे तो गाड़ी को सड़क से उतार कर किसी उचित स्थान पर लगाकर एमरजैंसी लाइटें चालू कर दें।
  • गाड़ी को सड़क पर लगी मार्किंग के अनुसार ही चलाएं।
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