घर में शौचालय नहीं तो सरकारी सेवकों को अप्रैल से वेतन नहीं

सरकारी वेतन और मानदेय पर काम करने वाले उन सरकारी सेवकों को अब अनिवार्य रूप से अपने घरों में शौचालय बनवाने होंगे जो फील्ड डय़ूटी करते हैं, खास तौर से ग्रामीण क्षेत्रों में। जिनके घरों में शौचालय नहीं होगा, उन्हें 31 मार्च के बाद से वेतन व मानदेय नहीं दिया जाएगा।

डीडीसी अमित कुमार ने बताया कि प्रधान सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद डीएम ने प्रखंड के अधिकारियों को सर्वे कर ऐसे लोगों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। अभी डेढ़ महीने का समय है ऐसे सरकारी लोग जिनके घरों में शौचालय नहीं है जरूर बनवा लें।

डीडीसी का कहना है कि आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, एएनएम, ममता कार्यकर्ता, विकास मित्र, टोला सेवक, होमगार्ड जैसे व्यक्ति शासन-प्रशासन के प्रतिनिधि होते हैं इसलिए उन्हें सबसे पहले सरकार की मंशा पूरी करनी होगी। सरकारी प्रतिनिधियों के घरों में ही शौचालय नहीं होंगे तो वे दूसरों को कैसे प्रेरित करेंगे। प्रखंड स्तर के पदाधिकारी घर-घर सर्वे कर एक सप्ताह में इस बाबत रिपोर्ट देंगे।

डीएम ने बीडीओ को शौच प्रथा से मुक्त पंचायतों का प्रतिदिन सुबह निरीक्षण करने का आदेश दिया है ताकि सुनिश्चित हो सके कि उन दो पंचायतों में अब कोई व्यक्ति खुले में शौच के लिए नहीं जा रहा। डीडीसी ने बताया कि सबौर और नाथनगर के बीडीओ को इस बाबत पत्र भेजा गया है। दोनों बीडीओ 29 फरवरी तक रोज सुबह 5.00 से 6.00 बजे तक पंचायतों में जाएंगे और हर व्यक्ति को घर में बने शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे। बीडीओ इसकी रोज रिपोर्ट देंगे। उन्हें यह भी देखना है कि ग्रामीण हाथ साफ करने के लिए साबुन का प्रयोग करें। डीडीसी ने बताया कि सबसे पहले मुखिया खुले में शौच प्रथा से अपनी पंचायत के मुक्त होने की घोषणा करते हैं। इसके बाद जिला स्तर पर इसकी घोषणा होती है। अब बीडीओ की रिपोर्ट पर इसकी सूचना मुख्यालय भेजी जाएगी। जब राज्य स्तर की टीम सत्यापन कर लेगी तब यह जानकारी केन्द्र सरकार को दी जायेगी।

कौन हैं सरकारी सेवक
अपने घरों में शौचालय बनाने के दायरे में आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, एएनएम, ममता कार्यकर्ता, विकास मित्र, टोला सेवक, किसान सलाहकार, पंचायत रोजगार सेवक, इन्दिरा आवास सेवक, होमगार्ड, स्कूल रसोईया, कृषि समन्वयक, हल्का कर्मचारी, पंचायत सचिव आदि आएंगे।

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