बिहार के हथुआ में आज भी कायम है राजतंत्र

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(शैलेश कुमार पाण्डेय  )

  • स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण .
  • सारकारी जमीन को बेच रहे है हथुआ राज के दलाल .
  • स्थानीय प्रशासन हथुआ महराज के सामने बना लचार.

 

गोपालगंज /हथुआ : आज भले ही हमारे देश को आजाद हुए 69  वर्ष हो गए है . इसके पहले हमारे देश में राजतंत्र था . राजतंत्र में राजा अपनी मनमानी के अनुसार राज करता था . आजादी के बाद राजतंत्र को खत्म कर दिया गया और प्रजातंत्र लागु हुआ . वर्ष 1956 में जमीनदारी उन्मूलन कानून लागु हो गया जिसमे राजतंत्र समाप्त हो गया और प्रजातंत्र कायम हुआ . लेकिन इन सारे नियम और कानूनों का हथुआ राज पर कोइ असर नही हुआ है यहा आज भी राजतंत्र ही कायम है , हथुआ राज परिवार आज भी प्रसाशनिक आदेशो की अवहेलना करते हुए अपनी मनमानी करता है , हथुआ राज के सहयोग से भू – माफिया सरकारी जमीनों को बेचकर उसपर अवैध निर्माण करा रहे है और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है . हथुआ के दक्षिण स्थित महैचा रोड में ढाई एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कार्य हो रहा है . लगभग चार माह से हो रहे है  अवैध निर्माण  , लेकिन प्रशासन ने करवाई को लेकर हाथ खड़े कर दिए है . लगभग सैकड़ो मजदूर प्रतिदिन स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से तिव्रगति से निर्माण कर रहे है अभी तक प्रशासन स्थानीय जमीन पर जाने से कतरा रहा है , वही भू – माफिया फर्जी रजिस्ट्री कर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण करा रहे है सरकारी जमीन जिसका खाता नंबर 02 जिसका कुल रकवा 7.66 है , जिसमे हथुआ राज बनाम बिहार सरकार के साथ 1975, 1985 में मुकदमा चला . इसमे बिहार सारकार की दो बार जित हुई , लेकिन मामला सेलिंग में होने के कारण स्थानीय डिसिएलार के कोर्ट में मुकदमा लंबित है .

इसको लेकर उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नही करने का आदेश कोर्ट ने स्थानीय सिओं व थाने को दिया है . इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की जानकारी में यहा अवैध निर्माण हो रहा है , हथुआ राज की जमाबंदी में है . लेकिन , मामला सेलिंग में होने के कारण किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण नही हो सकता है . लगभग आठ एकड़ भूमि पर अभी तक ढाई एकड़ भूमि को भू- माफिया अपने कब्जे में लेकर लगतार अवैध निर्माण करा रहे है ,

  उच्च न्यालय के आदेश पर जिला समहर्ता गोपालगंज के न्ययालय में चल रहा सेलिंग केश नम्बर 243/03/ 1973 1974 , 243/04/ 73-74 एवं 75/76 बिहार सरकार बनाम दुर्गेश्वरी शाही अन्य . वाली जमीनों में हथुआ राज कचहरी पुरानी किला आदि भवनों एवं बैल घाटा वाली जमीन , एवं श्मशान वाली जमीन पर अपना अधिकार हथुआ राज के वंशज द्वारा स्वरूप बदलने का कार्य  01-10-2012 से लगतार जारी है जबकि सारी जिम्मेवारी उच्च न्यालय द्वारा जिला प्रशासन को निर्देशित है की किसी भी परिस्थिति में सीलिंग वाली जमीन मौजा हथुआ , रतंचक, मछागर जगदीश , महैचा , थावे किला व  गोपालपुर का स्वरूप किसी भी परिस्थिति में स्वरूप परिवर्तित नही किया जा सकता है , अगर किसी भी हालत में उसके स्वरूप से छेड़ छाड़ किया जाता है तो इसकी जबाबदेहि जिला प्रशासन को है , लेकिन स्थानीय प्रसाशन के मिली भगत से हथुआ राज  द्वारा स्वरूप बदलने का कार्य आज भी किया जा रहा है , पुरानी किला हथुआ में गोपनीय ढंग से किला का स्वरूप बदलने एवं खुदाई का कार्य कराया जा रहा है  हथुआ राज प्रशासन की सहयोग लेकर खुलेआम इन सारे जगहों पर स्वरूप परिवर्तन कर रहा है , आज इस प्रजातंत्र में भी राजतंत्र कायम है , हथुआ राज कोर्ट के कोइ आदेश को आज भी नही मानता है इसका उदाहरण हथुआ राज द्वारा जगह – जगह स्वरूप परिवर्तन कराया जाना है , आखिर स्थानीय प्रशासन के पास ऐसी कौन सी मजबूरी है की हथुआ राज अपनी मनमानी कर रहा है और प्रशाशन मूकदर्शक बना हुआ है ?

उपरोक्त सभी मौजा की भूमि पर माननीय उच्च न्यालय के C.W.J.C 3217/1992 में निहित निर्देश के आलोक भू -हद्बंदी वाद संख्या 243/03 73-74  एवं 243/04 / 73-74 एवं 14/ 75-76 राज्य बनाम दुर्गेश्वरी शाही हथुआ की सुनवाई समहर्ता महोदय के न्यालय में चल रही है , स्थानीय प्रशासन एवं हथुआ राज के वंशज को न्यालय निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए . अगले अंक में हथुआ राज का विस्तृत ब्यौरा का खुलासा किया जाएगा .

 

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