कौशाम्बी:-विनोद,शैलेन्द्र औ भैया सबकी बहुत कठिन है डगर उन्नीस की:-सुजीत मिश्रा सिट्टी (9454118975)

कौशाम्बी लोकसभा सीट महागठबंधन की तरफ दिख रहा समीकरण’
उत्तर प्रदेश की हाई बोल्टेज़ लोकसभा सीट कौशाम्बी पर सभी पार्टीयों के नेताओ की पैनी नज़र है

एक नज़र इस सीट पर
कौशाम्बी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सिराथू,चायल,मंझनपुर व बाबागंज कुंडा(प्रतापगढ़ )
पांच विधानसभा क्षेत्र आते है

वर्तमान स्तिथि में एक ओर जहाँ
सांसद विनोद सोनकर जनता के बीच अपनी छवि बनाने में सफ़ल नही दिखे है’

जिसका इल्म सायद उन्हें भी बख़ूबी है इसलिए पार्टी के तमाम शीर्ष नेताओं के सम्पर्क में रहकर वो अपना टिकट क्लियर करने में लगे हुए है यू तो विनोद भाजपा की अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है लेकिन सोनकर समाज के अलावा कोई भी अनुसूचित समाज का व्यक्ति सायद ही उनसे जुड़ाव महसूस कर पा रहा है पार्टी के स्थानीय ज्यादातर नेता भी अपने सांसद से सन्तुष्ठ नही दिख रहे है। जिसका नुकसान भी 2019 चुनाव में हो सकता है।

जनसत्ता में जाने का फैसला कही आत्मघाती न हो जाये पूर्व सांसद को’


कौशाम्बी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र बनने के बाद एक बार और कुल तीन बार देश के निचले सदन का सफर तय कर चुके शैलेंद्र कुमार ने हालही में बनी राजा भैया की जनसत्ता से जुड़कर चुनावी मैदान में है
जिसका शैलेंद्र को फायदा हो न हो लेकिन नुक़सान होता साफ दिखाई दे रहा है
यूँ तो राजा भैया बाबागंज और कुंडा से लाख वोट की बढ़त दिला चुके है लेकिन यह नही भूलना होगा कि तब राजा के समाजवादी पार्टी से बहुत अच्छे सम्बन्ध दे और शैलेंद्र साइकल के निशान पर चुनाव लड़े थे

कुंडा से भी लग सकता है झटका‘ :-

बेशक़ यह आपको हैरान कर देने वाली बात या बर्दास्त न हो ने वाली लगती हो लेकिन इसके पीछे भी बहुत बड़ी सियासत है ।
कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह के जीत का जायका बढ़ाने का काम वहां की लगभग 50 हज़ार से अधिक यादव मतदाता करते है जो समाजवादी पार्टी के मूलमतदाता है
अगर राजा के गढ़ से तनिक भी चूक हुई तो पूर्व सांसद के चौका लगाने का सपना टूट जाएगा।

महागठबंधन के चेहरे से होगा भाग्य का फैसला’ 


यूँ तो माया और अखिलेश ने हाथ मिलाकर तमाम प्रत्याशीयो की नींद उड़ा दी है मायावती के लिए विशेष कर कौशाम्बी सीट बहुत ही अहम है साथ अखिलेश भी राजा को सबक सिखाने का मौका नही चुंकेगे
मायावती और राजा भैया की प्रतिद्वंद्विता के चर्चे सभी की जुबान में है
इंद्रजीत सरोज को अगर महागठबंधन से प्रत्याशी बनाया जाता है तो शैलेंद्र के लिए बेहद नुकसान दायक हो सकता है क्योंकि निर्णायक पासी वोटरों में पूर्व मंत्री की पकड़ बेहतरीन है खैर जानकारों की माने तो इंद्रजीत चुनाव नही लड़ना चाहते ऐसे में अगर प्रत्याशी के चयन में गठबंधन से चूक हुई तो निश्चित ही परिणाम अलग हो सकते है

माया अखिलेश की रैली कर सकती है खेल

कौशाम्बी लोकसभा चुनाव में निश्चित ही दोनों नेता रैली करेंगे नही तो कम से माया तो जरूर करेगी दोनों की रैली के बाद मुस्लिम,दलित,यादव मतदाता अगर प्रभावित हुआ तो महागठबंधन के लिए राह आसान हो जाएगी

बालम महाराज भी पहुंचाएंगे चोट’

यह कह पाना तो मुश्किल है कि स्थानीय दबंग नेता शशिभूषण द्विवेदी उर्फ बालम महाराज किसको कितना नुकसान पहुंचा सकते है लेकिन नुकसान तो जरूर पहुंचाएंगे वर्तमान में शिवपाल की पार्टी में बालम है गौरतलब है कि बालम बसपा के शीर्ष नेता सतीश चंद्र मिश्रा के भी क़रीबी है औरब बालम के पास लगभग 30-40 हज़ार वोट है जो निर्णायक भूमिका निभा सकते है।

 पटेल और ब्राह्मण करेंगे सबको हैरान 

भाजपा का मूल मतदाता कहा जाने वाला ब्राह्मण इन दिनों भाजपा से कुछ नाराज़ है साथ ही स्थानीय सांसद की कार्यशैली से चिंतित भी है
विनोद की ब्राह्मण विरोधी फेसबुक पोस्ट से आज तक ब्राह्मण समाज आहत है
ऐसे में ब्राह्मण समाज राजा या महागठबंधन की तरफ रुक करें तो कोई हैरानी नही होंगी

पटेल मतदाता भी काफी बड़ी भूमिका निभा सकता है अनुप्रिया के साथ आने के बाद भाजपा को इस समाज का लाभ मिलना स्वभाविक है साथ ही ‘विनोद का इस मामले में मैनेजमेंट शुरू से ठीक रहा है पटेल साधने में सांसद को सफलता मिली हैं’

मौर्या करेगा अपने नेताओं के इशारे का इंतज़ार
सीट पर हार और जीत के अंतर का फ़र्क़ इस समाज के वोटर निर्धारित कर सकते है यू तो केशव व स्वामी भाजपा में है स्वाभाविक है कि इसका वोट भाजपा को जाए लेकिन ‘क्या सांसद और मौर्य नेताओ के बीच सबकुछ ठीक हैं‘ अगर नही तो विनोद के लिए दुबारा दिल्ली जाने का रास्ता काफ़ी मुश्किल दिखाई दे रहा हैं

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