Local & National News in Hindi

दिल्ली में प्रदूषण की मार, लेकिन GRAP लागू करने में हुई बड़ी लापरवाही! CAQM रिपोर्ट में खुली प्रशासन की पोल

51

दिल्ली NCR और आस-पास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने आयोग द्वारा स्थापित GRAP मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम द्वारा मॉनिटर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को रोजाना मॉनिटर किया जा रहा. इसके स्टेज-III और स्टेज-IV के तहत बताए गए उपायों को लागू करने के संबंध में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और NCR में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) की परफॉर्मेंस रिपोर्ट की समीक्षा की है.

CAQM का GRAP मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम NCR में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए संबंधित एजेंसियों द्वारा उपायों/कार्रवाइयों को लागू करने की स्थिति की लगातार निगरानी और समीक्षा कर रहा है. GRAP के शेड्यूल के तहत खास कार्रवाइयां तय की गई हैं और इन्हें लागू करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की पहचान भी GRAP के शेड्यूल में की गई है.

कार्रवाई करने में हुई कमी

संबंधित एजेंसियों की तरफ से की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी उन्हें रोज़ाना अपडेट और साप्ताहिक ईमेल के ज़रिए दी जा रही है. GRAP स्टेज-III और स्टेज-IV के दौरान की गई कार्रवाइयों की समीक्षा से पता चलता है कि लागू करने में गंभीर कमियां और बड़ी खामियां हैं, जिसमें प्रमुख अनिवार्य कार्रवाइयों में 7% से 99.6% तक की कमी है. GRAP मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम ने अनसुलझी शिकायतों की उच्च पेंडेंसी भी देखी, जो 47% से 100% तक है, जो कमजोर प्रवर्तन और शिकायत निवारण तंत्र को दर्शाता है.

कहां-कहां रहीं कमियां?

GRAP के स्टेज-III (02.01.2025 तक) के दौरान, 500 वर्ग मीटर और उससे ज़्यादा के कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन (C&D) साइट्स के फिजिकल इंस्पेक्शन में बड़ी कमियां पाई गईं. इसमें दिल्ली (NCR) में औसत कमी 87%, हरियाणा (NCR) में तय ज़रूरी ज़रूरतों के मुकाबले 99.6%, राजस्थान (NCR) में 84% और उत्तर प्रदेश (NCR) में 96% थी.

मशीनों से साफ की गई सड़कों की लंबाई (किलोमीटर में) भी ज़रूरी लेवल से काफी कम रही. इसमें दिल्ली और हरियाणा (NCR) में 69% की कमी थी, जबकि राजस्थान (NCR) में 31% की कमी दर्ज की गई, वहीं उत्तर प्रदेश (NCR) में ज़रूरत से थोड़ा ज़्यादा 4% काम हुआ. इसके अलावा, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSMs) की तैनाती भी कम रही, जिसमें दिल्ली में औसत कमी 59% और हरियाणा (NCR) में 13% थी, जबकि राजस्थान (NCR) और उत्तर प्रदेश (NCR) में तय ज़रूरत से क्रमशः 93% और 76% ज़्यादा काम हुआ.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.