नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए वित्त वर्ष 2021-22 के बजट को मौजूदा दौर के लिए तमाम विशेषज्ञ उपयुक्त मान रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बजट लेकर कहा कि लंबे समय से हम जो सपना देखते थे, वो सपना नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार हुआ है। लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण को केंद्र में जगह मिली है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश 137% बढ़ा है, ये पिछले साल के अनुमानित बजट से 2.37 गुना ज़्यादा है।
वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत को मज़बूत बनाने का बजट है। ये सभी सेक्टरों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। स्वास्थ्य सेक्टर में लगभग 137% की वृद्धि की गई। ये बजट 70,000 गांवों को मजबूत करेगा। 602 गांवों में डिस्ट्रिक्ट लेवल पर क्लीनिक बनेंगे वो विशेष उपलब्धि है।
हालांकि, विपक्ष को ये बजट रास नहीं आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘हमें उम्मीद थी कि असाधारण स्थिति में जब बजट पेश होगा, तो इसमें असाधरण कदम उठाने की झलक मिलेगी। लेकिन सरकार असाधारण स्थिति में बड़े साधारण और निजीकरण की राह पकड़ कर खुद को बचाना चाहती है।’
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिये आत्मनिर्भर पैकेज के तहत 27.1 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की गई है। कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए कोविड-19 वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ के फंड का एलान किया गया है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान रखने की सराहना की है। डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र पर जो विशेष ध्यान रखा गया है, वो कोरोना महामारी से लड़ने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। वैसे, कोरोना काल के शुरुआत से ही भारत में सक्रिय रूप से महामारी का प्रबंधन किया गया है। इसके परिणाम भी पूरे विश्व के सामने हैं।
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