Local & National News in Hindi

Covid-19: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य प्रमुख ने कहा- फंडिंग और हमारी ‘पहुंच’ रोक सकती है भुखमरी

47

एपी। विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख का कहना है कि वह एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ दुनिया के कुछ सबसे अमीर देशों के नेताओं के साथ फोन पर जुड़े हुए हैं। कोरोना वायरस महामारी न केवल आपकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि कमजोर और संघर्षग्रस्त देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी खराब कर रही है जहां उन देशों के लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है

डेविड बेस्ली ने द एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि वह नेताओं को यह भी बता रहे हैं कि आपूर्ति श्रृंखला (maintaining supply chains) को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। लेकिन उन्होंने कहा कि इनमें कई तरह की बाधाएं हैं – निर्यात प्रतिबंध, बंद सीमाएं और बंदरगाह, उत्पादन नहीं करने वाले खेत और सड़कें बंद।

उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास पैसा और पहुंच है तो हम अकाल को रोक सकते हैं और हम वास्तव में भुखमरी से होने वाली मानवीय मृत्यु को रोक सकते हैं। लेकिन बेस्ली ने कहा कि अगर हम अपना फंड के लिए आगे नहीं आते हैं या हम आपूर्ति श्रृंखला खो देते हैं, तो आपदा आ सकती है।

बेस्ली ने पिछले हफ्ते यू.एन. सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी थी कि जैसा कि दुनिया COVID-19 महामारी से जंग लड़ रही है, यह एक भूख महामारी के कगार पर है जो कुछ महीनों के भीतर खतरनाक रुख अपना लेगी, अगर तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती है तो। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में हर रात 821 मिलियन लोग भूखे सोते हैं। वहीं 135 मिलियन लोगों को पूरा खाना नहीं मिल पाता, जो बदतर स्थिति का सामना कर रहे हैं। एक नए विश्व खाद्य कार्यक्रम के विश्लेषण से पता चलता है कि COVID-19 के परिणामस्वरूप अतिरिक्त 130 मिलियन लोग 2020 के अंत तक भुखमरी के कगार पर आ जाएंगे।

बेस्ली ने कहा कि डब्लूएफपी किसी भी दिन लगभग 100 मिलियन लोगों को भोजन प्रदान कर रहा है, जिसमें लगभग ऐसे 30 मिलियन लोग शामिल हैं, जो जीवित रहने के लिए सिर्फ हम पर निर्भर हैं। बताया गया कि अगर इन 30 मिलियन लोगों तक खाना नहीं पहुंच पाएगा तो तीन महीने में हर एक दिन 3 लाख लोगों को भूख से अपनी जान गंवानी पड़ सकती है। इसमें कोरोना वायरस के कारण बढ़ी हुई भुखमरी शामिल नहीं है।

डब्ल्यूएफपी के मुताबिक, सबसे खराब स्थिति में, हम लगभग तीन दर्जन देशों में अकाल देख रहे थे और उनमें से 10 ऐसे हैं जिनमें भुखमरी के कगार पर प्रति देश के 1 मिलियन से अधिक लोग हैं। डब्ल्यूएफपी के अनुसार, 2019 में सबसे खराब खाद्य संकट वाले 10 देश यमन, कांगो, अफगानिस्तान, वेनेजुएला, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, सीरिया, सूडान, नाइजीरिया और हैती थे।

सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग के बाद साक्षात्कार में, बेस्ली ने कहा कि WFP के लिए समर्थन संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, यूरोपीय संघ, जापान और अन्य समृद्ध राष्ट्रों से आता है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक बिगड़ती हैं, जो हमारे पैसे को प्रभावित करेगी। तो यह विकासशील देशों में अर्थव्यवस्थाओं को विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर सकती है, जिसमें लोगों को खाना मिलने में भी परेशानी होगी। यहां WFP द्वारा कई देशा का उदाहरण दिया गया, जिसमें कहा गया कि किसी देश को पर्यटन से पैसा आता था तो किसी को तेल बेचकर, लेकिन अभी फिलहाल सब बंद है।

बेस्ली ने जोर देकर कहा कि हम इसे भूख बनाम COVID नहीं कह सकते।

उन्होंने कहा, ‘हमें एक साथ काम करना चाहिए और पूरे हालात को समझना चाहिए। आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखना चाहिए और आर्थिक प्रभाव को कम करना चाहिए ताकि हम यह सुनिश्चित कर सकें कि लोग मौत के मुंह में न जाएं। इसी कड़ी में दुनिया के कुछ सबसे अमीर देशों के नेताओं के संपर्क में है, जिससे स्थिति को बिगड़ने ना दिया जाए।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.