अखिलेश से लंबी वार्ता के बाद 36 सीटों पर जयंत चौधरी करना पड़ा समझौता जल्द हो सकता है ऐलान

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रिपोर्ट – अनमोल कुमार

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। एक तरफ अखिलेश यादव की रथयात्रा प्रदेश भर में चल रही है तो वहीं गठबंधन के लिए भी लगातार बातचीत चल रही है। एक तरफ अखिलेश ने पूर्वी यूपी में सुलेहदेव भारतीय समाज पार्टी को साध लिया है तो वहीं पश्चिम यूपी में रालोद के साथ डील पक्की होने वाली है* ।लेकिन बड़ी बात ये सामने आरही है कि पीस पार्टी उलेमा कॉन्सिल जैसे मुस्लिम दलो से सपा प्रमुख दुरी बनाते दिख रहे है ये बात अलग है सपा का बेस वोट मुस्लिम ही माना जाता रहा है।लेकिन अखिलेश को मानो मुस्लिम वोट चाहिए ही नही ऐसा प्रतीत होता है एक भी मुस्लिम लिडेरशिप वाली पार्टी से बात न करना तो यही दर्शाता है अखिलेश की ये बात मुस्लिम वोटर पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है। सूत्रों के मुताबिक जयंत चौधरी की पार्टी रालोद को पश्चिम यूपी में 36 सीटें मिल सकती हैं। जिन पर मुस्लिम जाट बहुल अधिक है लेकिन क्या मुस्लिम वोट मिलेगा इसके अलावा दो से तीन सीटों पर रालोद के सिंबल पर सपा के नेता चुनावी समर में उतर सकते हैं। बैरहाल
इस महीने के आखिर तक अखिलेश यादव और जयंत चौधरी यूपी में सीट शेयरिंग फॉर्म्यूले का ऐलान कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय लोक दल ने शुरुआत में 62 सीटों की मांग की थी, लेकिन समाजवादी पार्टी 30 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं थी। आखिर में रालोद के लिए 36 सीटें छोड़ने पर समाजवादी पार्टी ने मुहर लगा दी । गुरुवार को अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच लंबी बातचीत के बाद यह डील पक्की होने की बात कही जा रही है। रालोद की मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर जैसे जिलों में मजूबत उपस्थिति है। लेकिन वो मुस्लिम अगर साथ आए तब ।
इसके अलावा ब्रज क्षेत्र के बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा जैसे जिलों में रालोद की पकड़ है। एक तरफ पश्चिम यूपी की सीटों पर रालोद को बढ़त है तो वहीं ब्रज के बड़े क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को पीस पार्टी से गठबंधन का फायदा मिल सकता था। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक रालोद ने भी पीस पार्टी व् मीम जैसी पार्टीयो से दूरी बनाई हुई है क्या इसका नुकसान सपा रालोद गठबंधन को ज़्यादा होगा या कम ये तो चुनाव नतीजे आने के बाद पता चलेगा । किसान आंदोलन के चलते जाटों और किसानों की भाजपा से नाराजगी का फायदा रालोद को मिलने की उम्मीद है। लेकिन क्या अकेले किसान रालोद की नैया को पार लगा पायगे ।इसके अलावा चौधरी अजित सिंह की मौत के बाद जयंत चौधरी का यह पहला चुनाव है।

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